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डीएम ऑफिस में कफन ओढ़कर लेटा बुजुर्ग
उत्तर प्रदेश के Basti जिले में एक अनोखा और चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक बुजुर्ग व्यक्ति कफन ओढ़कर जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर लेट गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। यह दृश्य देखने के बाद मौके पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी तुरंत सक्रिय हो गए। बुजुर्ग का यह कदम किसी विरोध प्रदर्शन से कम नहीं था, बल्कि यह उसकी उस पीड़ा का प्रतीक था, जो वह वर्षों से झेल रहा है। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन को हिला दिया, बल्कि आम जनता का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया।
14 साल से खुद को जिंदा साबित कर रहा व्यक्ति
पीड़ित बुजुर्ग का दावा है कि वह पिछले 14 वर्षों से सरकारी कागजों में ‘मृत’ घोषित है, जबकि वह पूरी तरह जीवित है। उसने कई बार संबंधित विभागों में शिकायतें दर्ज कराई और अपने जिंदा होने के प्रमाण भी दिए, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। इस वजह से उसे बार-बार अपमान और परेशानियों का सामना करना पड़ा। बुजुर्ग का कहना है कि वह हर दिन अपनी पहचान साबित करने के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन सिस्टम की खामियों के कारण उसकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कर दी गई मौत
जानकारी के अनुसार, एक राजस्व अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वर्षों पहले बुजुर्ग को कागजों में मृत घोषित कर दिया। इस एक गलती ने उसकी पूरी जिंदगी को प्रभावित कर दिया। सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित होने के कारण उसे कई सुविधाओं से वंचित होना पड़ा और सामाजिक स्तर पर भी उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
पेंशन मिल रही, लेकिन पहचान पर संकट
हैरानी की बात यह है कि एक ओर सरकार की ओर से बुजुर्ग को पेंशन मिल रही है, जबकि दूसरी ओर राजस्व रिकॉर्ड में वह मृत दर्ज है। इस विरोधाभास ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुजुर्ग का कहना है कि वह अपने ही गांव और समाज में अपनी पहचान को लेकर संघर्ष कर रहा है। लोगों के बीच उसकी स्थिति असमंजस भरी हो गई है, जिससे उसे मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
घटना के बाद हरकत में आया प्रशासन
जैसे ही यह मामला सामने आया और बुजुर्ग ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया, प्रशासन हरकत में आ गया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उससे बातचीत की और मामले की जांच का आश्वासन दिया। प्रारंभिक जांच में यह माना जा रहा है कि कहीं न कहीं रिकॉर्ड में गंभीर त्रुटि हुई है, जिसे सुधारने की जरूरत है। अब संबंधित विभागों को इस मामले की पूरी जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक जीवित व्यक्ति को वर्षों तक मृत घोषित रखना न केवल लापरवाही है, बल्कि यह मानवाधिकारों से जुड़ा मामला भी बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस तरह की गलतियों को सुधारा नहीं गया, तो ऐसे मामले और भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस समस्या का समाधान कब और कैसे करता है।
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