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छापेमारी में बड़ा खुलासा, नकली पनीर बरामद
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। यहां जानी थाना क्षेत्र के नगला कुंभा गांव में संचालित दो अवैध फैक्ट्रियों पर छापेमारी कर करीब 28 क्विंटल नकली पनीर बरामद किया गया। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोग भी इस खुलासे से हैरान रह गए। टीम ने मौके से बड़ी मात्रा में संदिग्ध डेयरी उत्पाद और कच्चा माल भी जब्त किया। अधिकारियों के अनुसार, यह नकली पनीर लंबे समय से बाजार में सप्लाई किया जा रहा था और लोगों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा था।
खतरनाक केमिकल से तैयार हो रहा था पनीर
जांच के दौरान यह सामने आया कि फैक्ट्रियों में पनीर बनाने के लिए खतरनाक केमिकल और मिलावटी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि करीब 5300 लीटर दूध के अलावा कई ऐसे पदार्थ मिले, जिनका उपयोग आमतौर पर खाद्य पदार्थों में नहीं किया जाता। इन रसायनों के इस्तेमाल से तैयार किया गया पनीर स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मिलावटी उत्पाद लंबे समय तक सेवन करने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इस खुलासे ने खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सतर्कता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सगे भाइयों का गिरोह, दूर-दूर तक फैला नेटवर्क
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि दोनों फैक्ट्रियों का संचालन सगे भाई कर रहे थे। उन्होंने मिलकर एक संगठित नेटवर्क तैयार किया हुआ था, जिसके जरिए नकली पनीर को विभिन्न शहरों में सप्लाई किया जाता था। जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क केवल मेरठ तक सीमित नहीं था, बल्कि दिल्ली और उत्तराखंड तक फैला हुआ था। इस तरह यह गिरोह बड़े स्तर पर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है।
दिल्ली-उत्तराखंड तक होती थी सप्लाई
अधिकारियों के अनुसार, तैयार किया गया नकली पनीर बड़े पैमाने पर दिल्ली और उत्तराखंड के बाजारों में भेजा जाता था। वहां इसे असली पनीर के नाम पर बेचा जाता था, जिससे ग्राहकों को इसकी असलियत का अंदाजा तक नहीं होता था। इस सप्लाई चेन के जरिए आरोपी मोटा मुनाफा कमा रहे थे। इस खुलासे के बाद संबंधित राज्यों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है, ताकि इस तरह के अन्य मामलों की जांच की जा सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।
नमूने जांच के लिए भेजे, कार्रवाई जारी
छापेमारी के दौरान बरामद सभी संदिग्ध सामग्री के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं। खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा, फैक्ट्रियों को सील कर दिया गया है और आसपास के क्षेत्र में भी जांच अभियान चलाया जा रहा है।
स्वास्थ्य के लिए खतरा, सख्ती की जरूरत
इस घटना ने एक बार फिर खाद्य पदार्थों में मिलावट के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों पर सख्ती से अंकुश लगाने की जरूरत है, ताकि आम लोगों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सके। प्रशासन को चाहिए कि नियमित रूप से जांच अभियान चलाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। वहीं, लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है और संदिग्ध खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। यह मामला एक चेतावनी है कि थोड़े से लालच के लिए कुछ लोग समाज के स्वास्थ्य को दांव पर लगा रहे हैं।
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