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मां का सम इमोशन बनाम एल्गोरिदम
इमोशन और एल्गोरिदम के बीच उलझी ‘मां का सम’, मोना सिंह की सीरीज ने कहानी से ज्यादा सवाल खड़े किए
05 Apr 2026, 01:32 PM Maharashtra - Mumbai
Reporter : Mahesh Sharma
Mumbai

मां-बेटे के रिश्ते पर आधारित अलग कहानी

Maa Ka Sum एक ऐसी वेब सीरीज है, जो मां-बेटे के रिश्ते को एक नए नजरिए से दिखाने की कोशिश करती है। इसमें मोना सिंह ने विनीता का किरदार निभाया है, जो 40 के पार की एक महिला है, जबकि मिहिर आहूजा उनके बेटे अगस्त्य की भूमिका में नजर आते हैं। कहानी की शुरुआत एक भावनात्मक और हल्के-फुल्के अंदाज में होती है, जहां मां-बेटे के बीच दोस्ताना रिश्ता दिखाया जाता है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसमें कई जटिल मोड़ आते हैं, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।


एल्गोरिदम से रिश्तों को समझने की कोशिश

सीरीज की सबसे खास बात यह है कि इसमें रिश्तों को समझने के लिए एल्गोरिदम का सहारा लिया गया है। अगस्त्य अपनी मां के लिए एक परफेक्ट पार्टनर ढूंढने का फैसला करता है और इसके लिए वह गणितीय समीकरण और डेटा का उपयोग करता है। यह विचार नया और दिलचस्प जरूर है, लेकिन इसे जिस तरह से प्रस्तुत किया गया है, वह हर दर्शक को प्रभावित नहीं कर पाता। कई जगह यह कॉन्सेप्ट जटिल और अव्यवहारिक भी लगता है, जिससे कहानी का भावनात्मक असर थोड़ा कमजोर पड़ जाता है।


कहानी की गति बनी सबसे बड़ी कमजोरी

सीरीज की सबसे बड़ी कमी इसकी धीमी गति मानी जा रही है। जो बातें पहले कुछ एपिसोड में स्पष्ट हो जाती हैं, उन्हें बार-बार दिखाकर कहानी को खींचा गया है। इससे दर्शकों की रुचि कम हो सकती है। इसके अलावा, कहानी में ऐसे ट्विस्ट और टर्न्स की कमी है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखें। कई जगह ऐसा लगता है कि कहानी अपनी दिशा खो रही है और मुख्य मुद्दे से भटक रही है।


अभिनय ने संभाला कमजोर स्क्रिप्ट का भार

हालांकि, सीरीज की स्क्रिप्ट कमजोर नजर आती है, लेकिन कलाकारों के अभिनय ने इसे संभालने की कोशिश की है। मोना सिंह ने अपने किरदार को बेहद सहजता से निभाया है और उनके भावनात्मक सीन दर्शकों को जोड़ने में सफल रहते हैं। वहीं, मिहिर आहूजा ने भी अपने रोल में ईमानदारी दिखाई है। सहायक कलाकारों ने भी कहानी को मजबूती देने का प्रयास किया है, जिससे सीरीज पूरी तरह कमजोर नहीं लगती।


भावनात्मक गहराई और लॉजिक में संतुलन की कमी

सीरीज में भावनात्मक पहलू और तार्किक सोच के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है, लेकिन यह पूरी तरह सफल नहीं हो पाती। कई जगह इमोशन हावी हो जाते हैं, तो कहीं एल्गोरिदम का कॉन्सेप्ट भारी पड़ता है। यह असंतुलन दर्शकों को कन्फ्यूज कर सकता है। अगर कहानी में दोनों पहलुओं को बेहतर तरीके से जोड़ा जाता, तो यह सीरीज और प्रभावशाली बन सकती थी।


नया प्रयोग, लेकिन अधूरा असर छोड़ती सीरीज

कुल मिलाकर, Maa Ka Sum एक नया और अलग प्रयोग जरूर है, लेकिन यह दर्शकों पर गहरा असर छोड़ने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाती। इसमें अच्छी एक्टिंग और दिलचस्प कॉन्सेप्ट है, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और धीमी गति इसकी कमियां बन जाती हैं। यह सीरीज उन दर्शकों के लिए ठीक है, जो अलग तरह की कहानियां देखना पसंद करते हैं, लेकिन हर किसी के लिए यह पूरी तरह संतोषजनक अनुभव नहीं हो सकता।


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