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आईआईटी मंडी ने मानसिक स्वास्थ्य सुधार की पहल शुरू की
देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में बढ़ते मानसिक तनाव और आत्महत्या की घटनाओं को देखते हुए आईआईटी मंडी ने एक नई और अनोखी पहल शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना और उन्हें एक संतुलित जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है। संस्थान ने भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) को अपनाते हुए छात्रों के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार किए हैं, जिनमें पारंपरिक भारतीय तरीकों को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ा गया है। इस पहल के तहत छात्रों को मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करने के लिए विभिन्न गतिविधियों को शामिल किया गया है। संस्थान का मानना है कि केवल तकनीकी शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानसिक संतुलन भी उतना ही जरूरी है।
शास्त्रीय संगीत और रागों से कम हो रहा तनाव
इस पहल के तहत भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में अपनाया गया है। शोध में पाया गया है कि अलग-अलग रागों का मानव मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आईआईटी मंडी और आईआईटी कानपुर द्वारा किए गए अध्ययन में यह सामने आया कि कुछ विशेष राग तनाव को कम करने और मन को शांत करने में मदद करते हैं। छात्रों को नियमित रूप से संगीत सत्रों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जहां वे शास्त्रीय धुनों के माध्यम से मानसिक शांति का अनुभव करते हैं। इस प्रक्रिया में संगीत को एक प्रकार की थेरेपी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे छात्रों की एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन में सुधार देखा गया है।
योग, ध्यान और मंत्रोच्चार को भी मिला स्थान
आईआईटी मंडी ने केवल संगीत तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि योग, ध्यान और मंत्रोच्चार जैसी प्राचीन भारतीय विधाओं को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया है। संस्थान के विशेषज्ञों के अनुसार, ये सभी अभ्यास मानसिक तनाव को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक होते हैं। छात्रों को नियमित रूप से योग और ध्यान के सत्रों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके साथ ही, मंत्रोच्चार के माध्यम से मानसिक स्थिरता और आंतरिक शांति प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल कहीं न कहीं प्राचीन गुरुकुल परंपरा की झलक भी देती है, जहां शिक्षा के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक विकास पर भी ध्यान दिया जाता था।
प्राचीन ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपनाया गया
इस पहल की खास बात यह है कि इसमें प्राचीन भारतीय परंपराओं को केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि वैज्ञानिक आधार पर समझा और अपनाया गया है। संस्थान ने इन तकनीकों पर रिसर्च कर यह साबित करने की कोशिश की है कि ये उपाय वास्तव में प्रभावी हैं। छात्रों के व्यवहार, तनाव स्तर और मानसिक स्थिति पर इन गतिविधियों के प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अपनाई गई विधियां केवल परंपरागत नहीं बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी सही हैं। इस तरह यह पहल आधुनिक शिक्षा और पारंपरिक ज्ञान का एक बेहतरीन मेल बनकर सामने आई है।
क्यों पड़ी इस तरह की पहल की जरूरत
हाल के वर्षों में देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में छात्रों के बीच मानसिक तनाव और आत्महत्या की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। प्रतियोगिता का बढ़ता दबाव, करियर की चिंता और व्यक्तिगत समस्याएं छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही हैं। ऐसे में आईआईटी मंडी की यह पहल एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। संस्थान का उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना, बल्कि छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना भी है। इस तरह की पहल से छात्रों को अपने भावनात्मक तनाव को समझने और उससे निपटने में मदद मिल सकती है।
अन्य संस्थानों के लिए भी बन सकता है मॉडल
आईआईटी मंडी की यह पहल अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए एक उदाहरण बन सकती है। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो देश के अन्य कॉलेज और विश्वविद्यालय भी इसे अपनाने पर विचार कर सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच इस तरह के प्रयोग बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा के साथ-साथ मानसिक संतुलन पर ध्यान देना भविष्य की जरूरत है। ऐसे में आईआईटी मंडी का यह कदम न केवल छात्रों के लिए बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक नई दिशा तय कर सकता है।
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