Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
नकली दवाओं से बढ़ा खतरा
राजस्थान अस्पतालों में दवा गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, प्रसव के बाद महिलाओं की मौत से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
26 May 2026, 10:14 AM Rajasthan - Kota
Reporter : Mahesh Sharma
Kota

प्रसव के बाद मौतों से मचा हड़कंप

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल हो रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोटा स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद चार महिलाओं की मौत के मामले ने पूरे स्वास्थ्य विभाग को झकझोर दिया है। शुरुआती जांच में सामने आया कि महिलाओं को ब्लीडिंग रोकने के लिए जो इंजेक्शन दिए गए थे, उनके सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं। इसके बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। घटना के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के बीच भी डर का माहौल बन गया है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे थे, जिनमें से दर्द, बुखार और एलर्जी से जुड़ी दवाओं के सैंपल भी मानकों पर खरे नहीं उतरे। इस खुलासे के बाद सरकारी अस्पतालों की दवा खरीद और सप्लाई व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अगर अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं ही सुरक्षित नहीं होंगी तो मरीजों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है जो मौतों के वास्तविक कारणों और दवाओं की गुणवत्ता की जांच कर रही है।

ब्लीडिंग रोकने वाली दवा पर उठे सवाल

जांच में सबसे ज्यादा ध्यान उस इंजेक्शन पर केंद्रित है जिसे प्रसव के दौरान महिलाओं को ब्लीडिंग रोकने के लिए दिया गया था। रिपोर्ट में सामने आया कि दवा के कुछ सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं महिलाओं की मौत के पीछे खराब या नकली दवा तो जिम्मेदार नहीं थी। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने अभी तक सीधे तौर पर दवाओं को मौत का कारण मानने से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। वहीं परिजनों ने आरोप लगाया है कि लापरवाही और घटिया दवाओं की वजह से महिलाओं की जान गई। स्वास्थ्य विभाग अब दवा सप्लाई करने वाली कंपनियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है। अधिकारियों ने संबंधित बैच की दवाओं को अस्पतालों से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस घटना ने राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में दवा गुणवत्ता की निगरानी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रसव के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवाएं बेहद संवेदनशील होती हैं और उनमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। इसी कारण अब पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है।

11 दवाओं के सैंपल फेल होने से चिंता

मामले की जांच के दौरान केवल ब्लीडिंग रोकने वाली दवा ही नहीं, बल्कि कुल 11 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें दर्द, बुखार और एलर्जी जैसी सामान्य बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं। यह खुलासा स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक माना जा रहा है क्योंकि सरकारी अस्पतालों में हर दिन हजारों मरीज इन्हीं दवाओं पर निर्भर रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लंबे समय तक घटिया गुणवत्ता वाली दवाएं मरीजों को दी जाती रहीं तो इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कई जिलों में दवाओं के स्टॉक की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों को आशंका है कि खराब गुणवत्ता वाली दवाओं की सप्लाई केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं हो सकती। इस घटना ने सरकारी दवा खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों में यह डर बढ़ रहा है कि कहीं इलाज के नाम पर उन्हें ऐसी दवाएं तो नहीं दी जा रहीं जो मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दवा परीक्षण प्रक्रिया को और सख्त बनाने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

अस्पताल प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने दावा किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए मेडिकल विशेषज्ञों की टीम गठित की गई है। अस्पताल प्रशासन फिलहाल मौतों को सीधे नकली दवा से जोड़ने से बच रहा है। उनका कहना है कि कई बार प्रसव के दौरान अन्य जटिलताएं भी जानलेवा साबित हो सकती हैं। हालांकि परिजनों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी नेताओं ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि राज्यभर के अस्पतालों में दवा गुणवत्ता की जांच अभियान चलाया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि दवा खरीद से लेकर सप्लाई तक की पूरी व्यवस्था में सुधार करना होगा।

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर प्रश्न

इस पूरे मामले ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोग सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए इसलिए जाते हैं क्योंकि वहां कम खर्च में बेहतर उपचार मिलने की उम्मीद होती है। लेकिन यदि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की गुणवत्ता ही संदिग्ध हो जाए तो मरीजों का भरोसा कमजोर पड़ना स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का कहना है कि दवा खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमित गुणवत्ता परीक्षण बेहद जरूरी है। कई बार सप्लाई चेन में लापरवाही या भ्रष्टाचार की वजह से घटिया दवाएं अस्पतालों तक पहुंच जाती हैं। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते दवाओं की जांच होती तो शायद यह स्थिति पैदा नहीं होती। महिला संगठनों ने मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं चिकित्सा विशेषज्ञों ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली हर दवा की नियमित जांच अनिवार्य बनाने की सलाह दी है। राज्य सरकार अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बड़े स्तर पर समीक्षा की तैयारी में है।

मरीजों में बढ़ा डर, सख्त कार्रवाई की मांग

घटना सामने आने के बाद सरकारी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजनों के बीच डर का माहौल बन गया है। लोग अब अस्पतालों में दी जा रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाने लगे हैं। कई मरीजों ने डॉक्टरों से दवाओं के बारे में जानकारी मांगनी शुरू कर दी है। सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दवा कंपनियों या सप्लाई एजेंसियों की लापरवाही सामने आती है तो उनके लाइसेंस रद्द किए जाने चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल एक अस्पताल की समस्या नहीं हैं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चेतावनी हैं। सरकार अब दवा सप्लाई सिस्टम की व्यापक जांच कराने पर विचार कर रही है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं मृत महिलाओं के परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं और पूरे मामले की पारदर्शी जांच चाहते हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट इस मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे कर सकती है।






Latest News

Feed shows today's latest first, then previous days to complete up to 50 items.
thumb
बगीचे में खेल रही मासूम पर तेंदुए का हमला, परिवार के सामने उजड़ा घर, गांव में दहशत का माहौल
June 03, 2026
thumb
Meerut: मवाना में दिन निकलते ही ईडी का छापा, कपड़ा कारोबारी के घर जांच जारी, किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं
June 03, 2026
thumb
चीन को पीछे छोड़ मलेशिया की ओर बढ़े कदम, पहले विदेशी दौरे से बांग्लादेश ने दिया बड़ा कूटनीतिक संकेत
June 03, 2026
thumb
15 अगस्त पर भारत को विशेष सम्मान, न्यूयॉर्क सीनेट के प्रस्ताव से मजबूत हुए वैश्विक रिश्तों के नए आयाम
June 03, 2026
thumb
सूर्या हत्याकांड के बाद बड़ा प्रशासनिक अभियान, अपराधियों पर शिकंजा, अवैध गतिविधियों के खिलाफ तेज हुई कार्रवाई पूरे जिलेभर में
June 03, 2026
thumb
भारत, चीन और प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर नए शुल्क की तैयारी, वैश्विक कारोबार में बढ़ी हलचल और चिंता
June 03, 2026
thumb
अभिनय से विराम लेने की सोच में मनोज बाजपेयी, जीवन के अगले पड़ाव और आत्ममंथन पर खुलकर रखी अपनी बात
June 03, 2026
thumb
राजधानी के विशेष नियोजन क्षेत्र में कार्रवाई तेज, अवैध निर्माणों पर सख्ती से बढ़ी संपत्ति मालिकों की चिंता
June 03, 2026
thumb
12वीं बोर्ड मूल्यांकन प्रणाली पर उठे सवाल, बिना व्यापक परीक्षण लागू तकनीक को लेकर बढ़ी पारदर्शिता बहस देशभर में
June 03, 2026
thumb
होर्मुज संकट गहराया, तेल आपूर्ति चिंता बढ़ी; वैश्विक कंपनियों ने महंगाई और ऊर्जा बाजार में बड़े झटके की आशंका जताई
June 03, 2026