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पांच दिन बाद गांव पहुंचे शव
छुट्टियां मनाने निकला परिवार कभी नहीं लौटा घर, बेटे-बहू और दो मासूम पोतों की अर्थियां देख टूट गया पिता
03 Jun 2026, 11:49 AM Chhattisgarh - Durg
Reporter : Mahesh Sharma
Durg

पांच दिन बाद गांव पहुंचे शव

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के एक गांव में उस समय गम का माहौल छा गया, जब एक ही परिवार के चार सदस्यों के शव पांच दिन बाद उनके पैतृक गांव पहुंचे। कुछ दिन पहले तक जिस घर में छुट्टियों की खुशियां थीं, वहां अब सन्नाटा और मातम पसरा हुआ था। गांव की सड़कों पर लगातार पहुंचती एंबुलेंसों को देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। हर वाहन में एक ऐसा शव था, जिसकी वापसी का परिवार बेसब्री से इंतजार कर रहा था, लेकिन जीवित नहीं बल्कि ताबूत में बंद। ग्रामीणों के अनुसार गांव ने पहले कभी इतना दर्दनाक दृश्य नहीं देखा था। जैसे ही शव अंतिम दर्शन के लिए रखे गए, परिजनों और ग्रामीणों का दुख छलक पड़ा। हर चेहरे पर अविश्वास और पीड़ा साफ दिखाई दे रही थी। पूरा गांव इस त्रासदी से स्तब्ध नजर आया और हर व्यक्ति शोक में डूबा हुआ दिखाई दिया।

हिमाचल की वादियों में हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार परिवार छुट्टियां मनाने के लिए हिमाचल प्रदेश गया हुआ था। इसी दौरान पहाड़ी मार्ग पर उनकी कार एक गहरी खाई में गिर गई। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार सभी लोगों की जान चली गई। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल ने काफी प्रयासों के बाद शवों को बाहर निकाला। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं के कारण शवों को परिवार तक पहुंचाने में कई दिन लग गए। हादसे की खबर मिलते ही गांव और रिश्तेदारों के बीच शोक की लहर दौड़ गई थी। हर कोई किसी चमत्कार की उम्मीद कर रहा था, लेकिन समय के साथ यह उम्मीद भी समाप्त हो गई। इस दुर्घटना ने एक खुशहाल परिवार की पूरी दुनिया ही बदल दी।

अंतिम दर्शन में छलक पड़ा दर्द

जब चारों शव अंतिम दर्शन के लिए गांव के सार्वजनिक स्थल पर रखे गए, तब वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। परिजन अपने प्रियजनों को देखकर खुद को संभाल नहीं पाए। महिलाएं रो-रोकर बेसुध होती रहीं और पुरुषों की आंखों से भी आंसू बहते रहे। बच्चों और बुजुर्गों सहित पूरे गांव ने इस दुख को अपने परिवार का दुख मानकर महसूस किया। अंतिम दर्शन के दौरान लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई परिवार के साथ खड़ा दिखाई दिया। गांव के बुजुर्गों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा हृदयविदारक दृश्य कभी नहीं देखा। पूरे वातावरण में केवल सिसकियां और शोक की आवाजें सुनाई दे रही थीं।

पिता के लिए सबसे कठिन क्षण

इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू वह दृश्य था, जब एक पिता को अपने बेटे, बहू और दो मासूम पोतों की अर्थियों को अंतिम विदाई देनी पड़ी। जिसने अपने बेटे को पढ़ाया-लिखाया, उसे सफल होते देखा और परिवार बसाते देखा, उसी पिता को आज उसकी अंतिम यात्रा में शामिल होना पड़ा। यह क्षण इतना भावुक था कि वहां मौजूद लोग भी अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक सके। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि इस सदमे ने पूरे परिवार को भीतर तक झकझोर दिया है। पिता बार-बार अपने बेटे और पोतों की याद में भावुक होते रहे। यह दृश्य हर किसी के दिल को छू गया और पूरे गांव को गहरे दुख में डुबो गया।

गांव ने दी भावुक विदाई

अंतिम यात्रा के दौरान गांव की लगभग हर गली और सड़क पर लोग खड़े दिखाई दिए। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अंतिम यात्रा में भाग लेकर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी। लोगों ने फूल अर्पित किए और मौन रखकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी परिवार के प्रति शोक व्यक्त किया। गांव में दिनभर शोक का माहौल बना रहा। दुकानों और अन्य गतिविधियों पर भी इस घटना का असर देखने को मिला। लोगों का कहना था कि यह केवल एक परिवार का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे गांव की अपूरणीय क्षति है।

दर्द की यह कहानी सबको रुला गई

यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार के सपनों के खत्म हो जाने की कहानी बन गया। जो परिवार कुछ दिन पहले साथ घूमने निकला था, वह कभी वापस नहीं लौट सका। पीछे रह गए माता-पिता, रिश्तेदार और गांववाले अब केवल यादों के सहारे हैं। इस घटना ने हर किसी को जीवन की अनिश्चितता का एहसास कराया है। अंतिम संस्कार के बाद भी गांव में शोक का माहौल बना हुआ है और लोग लगातार परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं। दर्द और संवेदना से भरी यह कहानी लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बनी रहेगी और हर किसी को भावुक करती रहेगी।


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