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पीएम मोदी का संदेश और लेख की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में महिला आरक्षण बिल पर एक विशेष लेख लिखा। इस लेख में उन्होंने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लोकतंत्र की मजबूती और संवेदनशीलता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं सदी की विकास यात्रा में भारत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षणों की ओर बढ़ रहा है। आने वाले दशक में राजनीतिक निर्णयों और प्रशासनिक प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। लेख में यह भी उल्लेख किया गया कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व से न केवल प्रशासनिक निर्णय बेहतर होंगे, बल्कि लोकतंत्र अधिक संतुलित और संवेदनशील बनेगा।
महात्मा फुले और बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती
पीएम मोदी ने अपने लेख में सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक महात्मा फुले और बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती का संदर्भ भी दिया। उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल से महात्मा फुले की 200वीं जयंती समारोह शुरू होंगे और 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती मनाई जाएगी। यह अवसर महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के संदेश को मजबूत करने का काम करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल औपचारिक उत्सव नहीं बल्कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा
पीएम मोदी ने लेख में जोर दिया कि लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील और संतुलित बनाने का प्रयास अब और टालना उचित नहीं है। महिलाओं को प्रशासनिक निर्णय और नीति निर्धारण में शामिल करना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना लोकतंत्र की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में अहम कदम है। यह सिर्फ राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और बराबरी का प्रतीक भी है।
महिला आरक्षण बिल और 2029 लोकसभा चुनाव
प्रधानमंत्री ने लेख में उल्लेख किया कि महिला आरक्षण बिल 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होगा। इसके तहत सीटों की संख्या में वृद्धि कर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूत किया जाएगा। यह निर्णय न केवल महिलाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करेगा, बल्कि राजनीति में उनकी भागीदारी को भी स्थायी और प्रभावी बनाएगा। पीएम ने लिखा कि यह कदम लोकतंत्र और समाज की दोनों दृष्टि से ऐतिहासिक है।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए बड़े फैसले
पीएम मोदी ने अपने लेख में यह भी कहा कि कुछ फैसले समय से बड़े होते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बनते हैं। महिला आरक्षण बिल केवल वर्तमान की जरूरत नहीं बल्कि भविष्य की सोच का परिणाम है। यह निर्णय आने वाले वर्षों में महिलाओं को राजनीति और प्रशासनिक निर्णयों में बराबरी का अवसर देगा। उन्होंने सभी से इसे राष्ट्रीय हित और लोकतंत्र सुधार की दिशा में देखना चाहिए।
महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र का संतुलन
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में स्पष्ट किया कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व से लोकतंत्र अधिक संतुलित और जवाबदेह बनेगा। प्रशासनिक निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी समाज के हर वर्ग के लिए बेहतर नीतियां सुनिश्चित करेगी। पीएम मोदी ने सभी नेताओं और नागरिकों से आग्रह किया कि इस ऐतिहासिक अवसर का समर्थन करें और महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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