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नासिक में मल्टीनेशनल कंपनी में उत्पीड़न
नासिक में स्थित एक प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली आठ महिलाओं ने गंभीर यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। पीड़िताओं के अनुसार, उन्हें काम के दौरान लगातार अपमान और धमकियां दी जाती थीं। यह घटनाएं साल 2022 से लगातार हो रही थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कंपनी के HR विभाग में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला। पीड़िताओं ने आरोप लगाया कि उनके वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें इंजीनियर और टीम लीडर शामिल थे, ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया।
पुलिस ने दर्ज किए नौ मामले
इस मामले में मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में आठ और देवलाली पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, शिकायतें गंभीर और संवेदनशील हैं। नासिक पुलिस ने असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर (ACP) के नेतृत्व में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है। SIT ने अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में इंजीनियर और टीम लीडर भी शामिल हैं। SIT अब मामले की पूरी गहन जांच कर रही है और सभी साक्ष्यों को इकट्ठा किया जा रहा है।
HR विभाग की भूमिका पर सवाल
पीड़िताओं ने आरोप लगाया कि HR विभाग ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। महिलाओं ने बार-बार शिकायत दर्ज करवाई लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। HR विभाग की निष्क्रियता से पीड़िताओं का मनोबल टूट गया और उन्हें न्याय नहीं मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में HR विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठते हैं और यह संस्थागत कमजोरी का उदाहरण है। SIT इस पहलू की भी जांच कर रही है।
पुरुष कर्मचारी पर दबाव का आरोप
मामले में एक पुरुष कर्मचारी ने भी आरोप लगाया है कि उसका ब्रेनवॉश किया गया और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया। इस पहलू ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस ने कहा कि उत्पीड़न केवल महिलाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि पुरुष कर्मचारियों को भी मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा। SIT इस मामले में सभी आरोपों की गहन जांच कर रही है।
SIT की गहन जांच और आगे की कार्रवाई
SIT ने आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही कंपनी के दस्तावेज और रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। टीम मामले की सभी जानकारियों को जुटा रही है, जिसमें कर्मचारियों के बयान, ईमेल और कार्यालय के CCTV फुटेज शामिल हैं। पुलिस ने कहा कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। SIT की जांच से इस मामले में पूरी सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलेगी।
कानूनी और सामाजिक प्रभाव
इस घटना ने महाराष्ट्र में कंपनियों में महिला सुरक्षा और मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ जागरूकता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि संस्थागत सुरक्षा और जिम्मेदारी की कमी भी दर्शाते हैं। पुलिस और SIT की सक्रिय भूमिका से यह संदेश गया है कि हर कर्मचारी को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल का अधिकार है।
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