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हार के बाद बयानबाज़ी तेज
अख्तर ने पहले साधा निशाना, अब दिखे नरम
भारत से हार के बाद शोएब अख्तर के बदले सुर, PCB नेतृत्व पर बहस तेज
17 Feb 2026, 11:26 AM Punjab - Lahore
Reporter : Mahesh Sharma
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Lahore टी20 मुकाबले में भारत से मिली करारी हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट में हलचल मच गई है। पूर्व तेज गेंदबाज Shoaib Akhtar, जिन्हें ‘रावलपिंडी एक्सप्रेस’ के नाम से जाना जाता है, ने पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पर तीखा हमला बोला, लेकिन बाद में उनके सुर कुछ नरम पड़ते नजर आए।

कोलंबो के R. Premadasa Stadium में खेले गए मैच में भारत ने पाकिस्तान को 61 रन से हराया। इस हार के बाद अख्तर ने सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर खुलकर नाराजगी जताई। उनका गुस्सा खास तौर पर Pakistan Cricket Board (PCB) और उसके चेयरमैन Mohsin Naqvi पर केंद्रित रहा।

अख्तर ने बोर्ड की चयन नीति, टीम मैनेजमेंट और नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्रिकेट को समझने वाले लोगों को प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उनके बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और क्रिकेट जगत में नई बहस छिड़ गई।

हालांकि, कुछ समय बाद अख्तर का रुख बदला हुआ दिखाई दिया। उन्होंने अपने ताजा बयान में कहा कि टीम को समर्थन की जरूरत है और आलोचना रचनात्मक होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हार-जीत खेल का हिस्सा है, लेकिन सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है।

इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान क्रिकेट की आंतरिक व्यवस्थाओं को फिर चर्चा में ला दिया है। पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड में स्थिरता और दीर्घकालिक रणनीति की कमी टीम के प्रदर्शन को प्रभावित कर रही है। चयन प्रक्रिया, कोचिंग स्टाफ और खिलाड़ियों के मनोबल पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि जब पूर्व दिग्गज खिलाड़ी सार्वजनिक रूप से आलोचना करते हैं तो उसका असर टीम और प्रशंसकों दोनों पर पड़ता है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि खुली आलोचना से सुधार की दिशा में दबाव बनता है।

भारत से मिली हार ने पाकिस्तान क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। आगामी टूर्नामेंटों को देखते हुए टीम को रणनीतिक बदलाव और मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता बताई जा रही है।

फिलहाल PCB की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है, लेकिन अंदरखाने बैठकों और समीक्षा की चर्चाएं तेज हैं। शोएब अख्तर के बदले हुए सुर यह संकेत देते हैं कि वे भी चाहते हैं कि आलोचना के साथ-साथ समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

कुल मिलाकर, यह प्रकरण केवल एक हार तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट की संरचना और नेतृत्व शैली पर व्यापक बहस को जन्म दे चुका है।