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एआई पर बड़ा दांव
एआई-रेडी डेटा सेंटर नेटवर्क का निर्माण प्रस्तावित
₹8 लाख करोड़ निवेश से 5GW डेटा सेंटर नेटवर्क बनाकर एआई क्षेत्र में बड़ा कदम
19 Feb 2026, 12:43 PM
Gujarat -
Ahmedabad
Reporter :
Mahesh Sharma
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Ahmedabad भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में Adani Group ने अगले दस वर्षों में लगभग 100 अरब डॉलर (करीब ₹8 लाख करोड़ से अधिक) निवेश की महत्वाकांक्षी योजना पेश की है। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य देशभर में 5 गीगावॉट क्षमता वाला एआई-रेडी डेटा सेंटर नेटवर्क विकसित करना है, जो हाई-एंड एआई मॉडल, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं को मजबूती प्रदान करेगा।
5GW डिप्लॉयमेंट का अर्थ है कि इस परियोजना के अंतर्गत कुल 5 गीगावॉट बिजली क्षमता का उपयोग किया जाएगा। यह ऊर्जा क्षमता अत्यंत विशाल मानी जाती है और इसे संचालित करने के लिए मजबूत पावर सप्लाई, कूलिंग सिस्टम और अत्याधुनिक हार्डवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी क्षमता वाला नेटवर्क भारत को एआई और क्लाउड सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकता है।
कंपनी की रणनीति ऐसे डेटा सेंटर स्थापित करने की है जो विशेष रूप से एआई वर्कलोड के लिए अनुकूलित हों। इसमें हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, उन्नत ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) और बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग की सुविधा शामिल होगी। इससे न केवल घरेलू स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों को फायदा मिलेगा, बल्कि वैश्विक कंपनियों को भी भारत में अपने एआई प्रोजेक्ट्स संचालित करने का मजबूत आधार मिलेगा।
भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। ई-कॉमर्स, फिनटेक, हेल्थटेक और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में डेटा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर नेटवर्क देश की डिजिटल जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इसी बीच, वैश्विक टेक कंपनियां भी भारत में निवेश बढ़ा रही हैं। हाल ही में Google ने भारत में अरबों डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। इससे स्पष्ट है कि भारत आने वाले वर्षों में एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह 5GW नेटवर्क समयबद्ध तरीके से विकसित होता है, तो इससे हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ऊर्जा, रियल एस्टेट तथा आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों को भी गति मिलेगी। साथ ही, हरित ऊर्जा के उपयोग और स्थिरता पर ध्यान देना भी इस परियोजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
कुल मिलाकर, यह निवेश भारत के टेक इकोसिस्टम को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। आने वाले वर्षों में एआई आधारित सेवाओं और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के बीच यह कदम देश को डिजिटल महाशक्ति बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
5GW डिप्लॉयमेंट का अर्थ है कि इस परियोजना के अंतर्गत कुल 5 गीगावॉट बिजली क्षमता का उपयोग किया जाएगा। यह ऊर्जा क्षमता अत्यंत विशाल मानी जाती है और इसे संचालित करने के लिए मजबूत पावर सप्लाई, कूलिंग सिस्टम और अत्याधुनिक हार्डवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी क्षमता वाला नेटवर्क भारत को एआई और क्लाउड सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकता है।
कंपनी की रणनीति ऐसे डेटा सेंटर स्थापित करने की है जो विशेष रूप से एआई वर्कलोड के लिए अनुकूलित हों। इसमें हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, उन्नत ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) और बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग की सुविधा शामिल होगी। इससे न केवल घरेलू स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों को फायदा मिलेगा, बल्कि वैश्विक कंपनियों को भी भारत में अपने एआई प्रोजेक्ट्स संचालित करने का मजबूत आधार मिलेगा।
भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। ई-कॉमर्स, फिनटेक, हेल्थटेक और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में डेटा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर नेटवर्क देश की डिजिटल जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इसी बीच, वैश्विक टेक कंपनियां भी भारत में निवेश बढ़ा रही हैं। हाल ही में Google ने भारत में अरबों डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। इससे स्पष्ट है कि भारत आने वाले वर्षों में एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह 5GW नेटवर्क समयबद्ध तरीके से विकसित होता है, तो इससे हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ऊर्जा, रियल एस्टेट तथा आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों को भी गति मिलेगी। साथ ही, हरित ऊर्जा के उपयोग और स्थिरता पर ध्यान देना भी इस परियोजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
कुल मिलाकर, यह निवेश भारत के टेक इकोसिस्टम को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। आने वाले वर्षों में एआई आधारित सेवाओं और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के बीच यह कदम देश को डिजिटल महाशक्ति बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।