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नेतृत्व बदलाव पर बहस
इंडिया गठबंधन में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज
इंडिया गठबंधन में नेतृत्व रोटेशन की मांग तेज, कार्ति चिदंबरम ने उठाया नया सवाल
19 Feb 2026, 11:11 AM
Tamil Nadu -
Chennai
Reporter :
Mahesh Sharma
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Chennai विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक में नेतृत्व को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने गठबंधन की कमान संभालने के लिए रोटेशन प्रणाली लागू करने की मांग उठाई है। उनका मानना है कि समय-समय पर नेतृत्व बदलने से सभी दलों को बराबरी का अवसर मिलेगा और गठबंधन ज्यादा प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा।
यह मुद्दा सबसे पहले संजय राउत द्वारा उठाया गया था। उन्होंने कहा था कि गठबंधन में नेतृत्व को लेकर स्पष्टता और सक्रियता जरूरी है। अब कार्ति चिदंबरम के बयान के बाद इस बहस ने नया मोड़ ले लिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि पहले संयोजक की भूमिका निभा चुके नीतीश कुमार के बाद अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी यह जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।
चिदंबरम ने कहा कि गठबंधन में कई अनुभवी नेता मौजूद हैं, जिनमें ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और एम.के. स्टालिन जैसे नाम शामिल हैं। यदि नेतृत्व की जिम्मेदारी तय समयावधि के लिए अलग-अलग नेताओं को सौंपी जाए, तो गठबंधन में ऊर्जा और सक्रियता बनी रहेगी।
इंडिया ब्लॉक की स्थापना केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट विपक्षी मोर्चा तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि, समय-समय पर गठबंधन की बैठकों और रणनीति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई नेताओं ने यह भी माना है कि जमीनी स्तर पर तालमेल की कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में नेतृत्व का स्पष्ट ढांचा तय करना आवश्यक हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रोटेशन प्रणाली लागू करने से गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन बना रहेगा। इससे छोटे और क्षेत्रीय दलों को भी महत्व मिलेगा, जो राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि बार-बार नेतृत्व बदलने से निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इस बीच, गठबंधन के भीतर संवाद बढ़ाने और नियमित बैठकों की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है। विपक्षी दलों के सामने आने वाले चुनावों और राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रणनीति बनाना एक बड़ी चुनौती है। मणिपुर की स्थिति, कानून व्यवस्था और आर्थिक नीतियों जैसे मुद्दों पर एकजुट रुख अपनाने के लिए मजबूत समन्वय जरूरी है।
कुल मिलाकर, इंडिया ब्लॉक में नेतृत्व को लेकर उठी यह नई मांग आने वाले दिनों में राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन के शीर्ष नेता इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या वास्तव में रोटेशन प्रणाली लागू की जाती है या नहीं।
यह मुद्दा सबसे पहले संजय राउत द्वारा उठाया गया था। उन्होंने कहा था कि गठबंधन में नेतृत्व को लेकर स्पष्टता और सक्रियता जरूरी है। अब कार्ति चिदंबरम के बयान के बाद इस बहस ने नया मोड़ ले लिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि पहले संयोजक की भूमिका निभा चुके नीतीश कुमार के बाद अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी यह जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।
चिदंबरम ने कहा कि गठबंधन में कई अनुभवी नेता मौजूद हैं, जिनमें ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और एम.के. स्टालिन जैसे नाम शामिल हैं। यदि नेतृत्व की जिम्मेदारी तय समयावधि के लिए अलग-अलग नेताओं को सौंपी जाए, तो गठबंधन में ऊर्जा और सक्रियता बनी रहेगी।
इंडिया ब्लॉक की स्थापना केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट विपक्षी मोर्चा तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि, समय-समय पर गठबंधन की बैठकों और रणनीति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई नेताओं ने यह भी माना है कि जमीनी स्तर पर तालमेल की कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में नेतृत्व का स्पष्ट ढांचा तय करना आवश्यक हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रोटेशन प्रणाली लागू करने से गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन बना रहेगा। इससे छोटे और क्षेत्रीय दलों को भी महत्व मिलेगा, जो राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि बार-बार नेतृत्व बदलने से निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इस बीच, गठबंधन के भीतर संवाद बढ़ाने और नियमित बैठकों की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है। विपक्षी दलों के सामने आने वाले चुनावों और राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रणनीति बनाना एक बड़ी चुनौती है। मणिपुर की स्थिति, कानून व्यवस्था और आर्थिक नीतियों जैसे मुद्दों पर एकजुट रुख अपनाने के लिए मजबूत समन्वय जरूरी है।
कुल मिलाकर, इंडिया ब्लॉक में नेतृत्व को लेकर उठी यह नई मांग आने वाले दिनों में राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन के शीर्ष नेता इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या वास्तव में रोटेशन प्रणाली लागू की जाती है या नहीं।