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डिप्टी सीएम का बयान
माघ मेले की घटना पर सियासी बयानबाजी तेज
प्रयागराज विवाद पर बढ़ी सियासत, ब्रजेश पाठक के बयान से नया राजनीतिक घमासान
19 Feb 2026, 12:20 PM
Uttar Pradesh -
Prayagraj (Allahabad)
Reporter :
Mahesh Sharma
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Prayagraj (Allahabad) प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के दौरान हुई कथित धक्का-मुक्की और ‘चोटी खींचने’ की घटना पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
इस मामले में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बयान देते हुए कहा कि किसी संत की चोटी खींचना महापाप है। उन्होंने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताया और कहा कि ऐसी हरकत करने वालों को इसका दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा। उनके इस बयान को डैमेज कंट्रोल की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर कानून-व्यवस्था और संतों के सम्मान की अनदेखी का आरोप लगाया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि संतों के साथ ऐसा व्यवहार होगा तो प्रदेश की छवि प्रभावित होगी। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही का आरोप भी लगाया।
मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विधानसभा में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार संत समाज के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की अनुचित घटना की जांच कराई जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, माघ मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन और संत समाज के बीच पहले से कुछ मतभेद थे। मौनी अमावस्या के दिन भारी भीड़ के चलते स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इसी दौरान कथित रूप से शंकराचार्य की पालकी के साथ धक्का-मुक्की हुई, जिसने विवाद का रूप ले लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों से जुड़े मुद्दे अक्सर सियासी रंग ले लेते हैं। इस प्रकरण में भी संत समाज की भावनाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन साधना सरकार के लिए चुनौती बन गया है।
फिलहाल सरकार ने मामले की जांच के संकेत दिए हैं, जबकि विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाए हुए है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या इससे प्रदेश की राजनीति पर कोई दीर्घकालिक असर पड़ता है।
प्रयागराज का यह विवाद केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।
इस मामले में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बयान देते हुए कहा कि किसी संत की चोटी खींचना महापाप है। उन्होंने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताया और कहा कि ऐसी हरकत करने वालों को इसका दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा। उनके इस बयान को डैमेज कंट्रोल की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर कानून-व्यवस्था और संतों के सम्मान की अनदेखी का आरोप लगाया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि संतों के साथ ऐसा व्यवहार होगा तो प्रदेश की छवि प्रभावित होगी। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही का आरोप भी लगाया।
मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विधानसभा में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार संत समाज के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की अनुचित घटना की जांच कराई जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, माघ मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन और संत समाज के बीच पहले से कुछ मतभेद थे। मौनी अमावस्या के दिन भारी भीड़ के चलते स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इसी दौरान कथित रूप से शंकराचार्य की पालकी के साथ धक्का-मुक्की हुई, जिसने विवाद का रूप ले लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों से जुड़े मुद्दे अक्सर सियासी रंग ले लेते हैं। इस प्रकरण में भी संत समाज की भावनाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन साधना सरकार के लिए चुनौती बन गया है।
फिलहाल सरकार ने मामले की जांच के संकेत दिए हैं, जबकि विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाए हुए है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या इससे प्रदेश की राजनीति पर कोई दीर्घकालिक असर पड़ता है।
प्रयागराज का यह विवाद केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।