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एक ही बैच की जोड़ी
मसूरी अकादमी में हुई मुलाकात ने लिया वैवाहिक रूप
मसूरी ट्रेनिंग से शुरू हुई दोस्ती दो युवा IAS अधिकारियों ने सादगी से की कोर्ट मैरिज
19 Feb 2026, 11:41 AM
Rajasthan -
Alwar
Reporter :
Mahesh Sharma
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Alwar देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा से जुड़ी एक प्रेम कहानी इन दिनों चर्चा में है। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान शुरू हुई दोस्ती अब विवाह के बंधन में बंध चुकी है। राजस्थान के अलवर में तैनात एसडीएम माधव भारद्वाज और गुजरात के जामनगर में कार्यरत एसडीएम अदिति वासने ने सादगीपूर्ण तरीके से कोर्ट मैरिज कर नई शुरुआत की है।
दोनों अधिकारी एक ही बैच के हैं और प्रशिक्षण काल के दौरान उनकी पहचान हुई। समान लक्ष्य, कड़ी मेहनत और देशसेवा का साझा सपना धीरे-धीरे दोस्ती में बदला और फिर यह रिश्ता जीवनसाथी बनने तक पहुंच गया। प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद दोनों अलग-अलग राज्यों में नियुक्त हुए, लेकिन संपर्क और समझ ने उनके रिश्ते को मजबूत बनाए रखा।
अलवर के मिनी सचिवालय में विवाह पंजीकरण की औपचारिकताएं पूरी की गईं। जिला कलेक्टर अर्पिता शुक्ला की उपस्थिति में आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हुए और दोनों ने कानूनी रूप से एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार किया। समारोह बेहद सादगीपूर्ण रहा, जिसमें परिवार के कुछ सदस्य और करीबी सहयोगी ही शामिल हुए।
आज के समय में जहां शादियां भव्य आयोजनों और बड़े खर्चों के लिए जानी जाती हैं, वहीं इन दोनों अधिकारियों ने सादगी को प्राथमिकता देकर एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका मानना है कि रिश्तों की मजबूती दिखावे से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और समझ से बनती है।
सूत्रों के अनुसार, पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह समारोह बाद में आयोजित किया जाएगा, जिसमें परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी में वैदिक विधि से फेरे लिए जाएंगे। फिलहाल दोनों अपने-अपने प्रशासनिक दायित्वों में व्यस्त हैं और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
यह कहानी न केवल प्रशासनिक सेवा से जुड़े युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि सफलता और जिम्मेदारी के बीच निजी जीवन को संतुलित तरीके से जिया जा सकता है।
मसूरी की पहाड़ियों से शुरू हुआ यह सफर अब जीवन की नई राह पर आगे बढ़ चुका है। सादगी, समर्पण और समान विचारधारा पर आधारित यह रिश्ता लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और युवाओं के लिए प्रेरणा भी।
दोनों अधिकारी एक ही बैच के हैं और प्रशिक्षण काल के दौरान उनकी पहचान हुई। समान लक्ष्य, कड़ी मेहनत और देशसेवा का साझा सपना धीरे-धीरे दोस्ती में बदला और फिर यह रिश्ता जीवनसाथी बनने तक पहुंच गया। प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद दोनों अलग-अलग राज्यों में नियुक्त हुए, लेकिन संपर्क और समझ ने उनके रिश्ते को मजबूत बनाए रखा।
अलवर के मिनी सचिवालय में विवाह पंजीकरण की औपचारिकताएं पूरी की गईं। जिला कलेक्टर अर्पिता शुक्ला की उपस्थिति में आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हुए और दोनों ने कानूनी रूप से एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार किया। समारोह बेहद सादगीपूर्ण रहा, जिसमें परिवार के कुछ सदस्य और करीबी सहयोगी ही शामिल हुए।
आज के समय में जहां शादियां भव्य आयोजनों और बड़े खर्चों के लिए जानी जाती हैं, वहीं इन दोनों अधिकारियों ने सादगी को प्राथमिकता देकर एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका मानना है कि रिश्तों की मजबूती दिखावे से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और समझ से बनती है।
सूत्रों के अनुसार, पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह समारोह बाद में आयोजित किया जाएगा, जिसमें परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी में वैदिक विधि से फेरे लिए जाएंगे। फिलहाल दोनों अपने-अपने प्रशासनिक दायित्वों में व्यस्त हैं और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
यह कहानी न केवल प्रशासनिक सेवा से जुड़े युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि सफलता और जिम्मेदारी के बीच निजी जीवन को संतुलित तरीके से जिया जा सकता है।
मसूरी की पहाड़ियों से शुरू हुआ यह सफर अब जीवन की नई राह पर आगे बढ़ चुका है। सादगी, समर्पण और समान विचारधारा पर आधारित यह रिश्ता लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और युवाओं के लिए प्रेरणा भी।