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AI वीडियो पर विवाद
स्पीकर बिरला के वीडियो को लेकर जांच शुरू
स्पीकर ओम बिरला पर AI वीडियो विवाद, कांग्रेस मीडिया सेल को नोटिस जारी
19 Feb 2026, 01:53 PM Delhi - New Delhi
Reporter : Mahesh Sharma
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New Delhi नई दिल्ली में हाल ही में संसद के अंदर एक राजनीतिक और विधायिकीय विवाद सामने आया है। लोकसभा के स्पीकर Om Birla के कथित AI वीडियो को प्रकाशित करने के आरोप में कांग्रेस पार्टी के मीडिया सेल को लोकसभा विशेषाधिकार विभाग ने नोटिस जारी किया है। नोटिस में इस मामले में शामिल आठ नेताओं से लिखित जवाब मांगा गया है।

विशेषाधिकार विभाग ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि कांग्रेस मीडिया सेल और संबंधित नेताओं को तीन दिन के भीतर अपना उत्तर प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संसद के मान और मर्यादा की रक्षा हो और किसी भी सदस्य के खिलाफ अनुचित सामग्री का प्रचार न हो।

सूत्रों के अनुसार, यह AI वीडियो विवाद तब सामने आया जब सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पीकर ओम बिरला के कथित वीडियो को लेकर चर्चा शुरू हुई। कांग्रेस मीडिया सेल पर आरोप है कि उन्होंने यह वीडियो प्रकाशित कर विधायिका के संवैधानिक नियमों का उल्लंघन किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल तकनीकी विवाद नहीं है, बल्कि संसद के विशेषाधिकार और सदस्यों के व्यक्तिगत सम्मान से जुड़ा है। इसके तहत विभाग जांच करेगा कि क्या कांग्रेस मीडिया सेल और संबंधित नेताओं ने जानबूझकर किसी प्रकार की गलती की या नहीं।

इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दल और कांग्रेस के अंदर भी विभिन्न स्तरों पर चर्चा चल रही है कि नोटिस के जवाब में कैसे स्थिति को संतुलित किया जाए। विभाग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नेताओं से पूरी तथ्यात्मक जानकारी देने को कहा है।

विशेषाधिकार विभाग की कार्रवाई यह संदेश देती है कि संसद और उसके सदस्यों की छवि और सम्मान को बनाए रखना कितना जरूरी है। साथ ही, यह तकनीकी प्लेटफॉर्म्स और मीडिया सेल्स को भी चेतावनी के रूप में देखा जा सकता है कि संवैधानिक और विधायिकीय नियमों का पालन करना आवश्यक है।

हालांकि कांग्रेस मीडिया सेल ने अब तक इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पार्टी और नेताओं की ओर से नोटिस के जवाब में विस्तृत स्पष्टीकरण दिया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला आने वाले दिनों में सोशल मीडिया और संसद की पारंपरिक मर्यादाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती पेश कर सकता है। इसी वजह से यह विवाद केवल तत्कालीन घटना नहीं बल्कि भविष्य में मीडिया और विधायिका के संबंधों को प्रभावित करने वाला मामला बन सकता है।