Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
शादी बनी प्रेरक उदाहरण
दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से इनकार
अलवर में दूल्हे ने लौटाए 31 लाख रुपये, दहेज के खिलाफ पेश की अनोखी मिसाल
13 Feb 2026, 01:02 PM Madhya Pradesh - Indore
Reporter : Mahesh Sharma
ADVERTISEMENT Sponsored
Ad
Open
Indore राजस्थान के Alwar जिले से दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जिसने समाज में सकारात्मक संदेश दिया है। Kotputli-Behror क्षेत्र के बानसूर इलाके के बिलाली गांव में आयोजित एक शादी समारोह उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब दूल्हे और उसके पिता ने 31 लाख रुपये की दहेज राशि लेने से साफ इनकार कर दिया।

जानकारी के अनुसार, बिलाली गांव निवासी जालिम सिंह के बेटे धीरेंद्र सिंह शेखावत की बारात 10 फरवरी को नागौर जिले के एक गांव में पहुंची थी। विवाह की सभी रस्में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हो रही थीं। इसी दौरान वधू पक्ष की ओर से 31 लाख रुपये दहेज के रूप में देने की बात सामने आई।

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, जैसे ही यह राशि दूल्हे पक्ष को सौंपने की तैयारी हुई, दूल्हे के पिता जालिम सिंह ने हाथ जोड़कर दहेज लेने से मना कर दिया। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि “आपने हमें अपनी बेटी सौंप दी है, इससे बड़ी कोई संपत्ति नहीं हो सकती।” उनके इस वक्तव्य के बाद पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।

बताया जा रहा है कि जालिम सिंह ने न केवल दहेज लेने से इनकार किया, बल्कि दी गई पूरी रकम तुरंत वापस करवा दी। इस साहसिक कदम ने समारोह में मौजूद रिश्तेदारों और ग्रामीणों को भावुक कर दिया। गांव के बुजुर्गों ने इसे दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत और अनुकरणीय कदम बताया।

समाज में जहां अक्सर दहेज को लेकर विवाद, तनाव और अपराध की खबरें सामने आती हैं, वहीं यह घटना एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हर परिवार इसी तरह का साहस दिखाए, तो दहेज जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दहेज प्रथा सामाजिक असमानता और आर्थिक दबाव को बढ़ावा देती है। ऐसे में इस तरह की पहल न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाली भी है।

इस विवाह समारोह की चर्चा अब आसपास के जिलों में भी हो रही है। सोशल मीडिया पर भी इस कदम की सराहना की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह शादी आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बनेगी।

दूल्हे और उसके परिवार के इस निर्णय ने यह साबित कर दिया कि रिश्ते पैसों से नहीं, बल्कि विश्वास और सम्मान से मजबूत होते हैं। यह घटना दहेज प्रथा के खिलाफ समाज को एक मजबूत संदेश देती है कि बदलाव की शुरुआत घर से ही की जा सकती है।