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मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में दलित छात्रा की हत्या के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अंकुश चौधरी के भाई और 24वीं वाहिनी पीएसी, मुरादाबाद में तैनात कॉन्स्टेबल अंकित को निलंबित कर दिया गया है। इस पूरे प्रकरण की जांच एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले को सौंपी गई है। साथ ही डीआईजी कलानिधि नैथानी ने मामले के सभी तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण कराने और आवश्यक विधिक राय लेने के निर्देश दिए हैं।
17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र में अनुसूचित जाति की छात्रा का शव बरामद हुआ था। जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकुश चौधरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन पीड़ित परिवार लगातार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहा था बुधवार को इसी मामले को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर पीड़ित परिवार और बड़ी संख्या में समर्थकों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
लोगों ने किया प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य आरोपी के भाई पीएसी कॉन्स्टेबल अंकित और उसकी मां की गिरफ्तारी, दो अन्य आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने, मामले में दुष्कर्म की धाराएं जोड़ने और विवेचना में कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान लोग कलेक्ट्रेट गेट के बाहर सड़क पर धरने पर बैठ गए, जिससे प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
जेल में बंद भाई की कर रहा था मदद
प्रदर्शन के बाद डीआईजी कलानिधि नैथानी ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया और 24वीं वाहिनी पीएसी के अधिकारियों से बातचीत की। इसके बाद कॉन्स्टेबल अंकित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद अंकित ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनके साथ होने का भरोसा दिलाया था। इस बातचीत का एक वीडियो भी पीड़ित पक्ष के पास मौजूद बताया जा रहा है। बाद में आरोप लगा कि वह जेल में बंद अपने भाई अंकुश की मदद कर रहा था। इसी बात को लेकर पीड़ित परिवार में नाराजगी बढ़ी और उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से इसकी शिकायत की।
पुलिस जांच के आधार पर कार्रवाई की बात कह रही है
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने पुष्टि करते हुए बताया कि कॉन्स्टेबल अंकित को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले के नेतृत्व में कराई जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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