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जयराम रमेश की याचिका पर सुप्रीम सख्त
कोर्ट बोली- गलत प्रक्रिया अपनाई तो लगेगा जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने जयराम रमेश की रिट याचिका पर प्रक्रिया को लेकर जताई कड़ी आपत्ति
12 Feb 2026, 01:58 PM
Delhi -
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
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New Delhi कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कड़ी टिप्पणी की और संकेत दिया कि यदि इसी तरह की याचिकाएं दाखिल की गईं तो भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
यह मामला पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़े एक पूर्व निर्णय को चुनौती देने से संबंधित था। जयराम रमेश ने रिट याचिका के माध्यम से अदालत के पुराने फैसले की समीक्षा की मांग की थी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा कि जब फैसले के खिलाफ पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका दायर करने का प्रावधान उपलब्ध है, तो सीधे रिट याचिका क्यों दाखिल की गई।
पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में निर्धारित उपायों का पालन आवश्यक है। अदालत ने कहा कि रिव्यू याचिका दाखिल किए बिना सीधे रिट के जरिए फैसले की समीक्षा मांगना उचित नहीं है। यदि हर पक्षकार इस तरह से अलग रास्ता अपनाने लगे तो न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जयराम रमेश के वकील से कहा कि प्रक्रिया की अनदेखी कर याचिका दाखिल करना गंभीर विषय है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि इस प्रकार की अपीलें जारी रहीं तो याचिकाकर्ता पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद जयराम रमेश की ओर से याचिका वापस लेने की इच्छा जताई गई। अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह रुख न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है। न्यायालय ने यह संदेश दिया है कि उपलब्ध वैधानिक उपायों को नजरअंदाज कर वैकल्पिक रास्ता अपनाना स्वीकार्य नहीं होगा।
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि शीर्ष अदालत प्रक्रियात्मक अनुशासन को लेकर सख्त है। किसी भी फैसले के खिलाफ निर्धारित कानूनी उपायों का पालन करना अनिवार्य है, अन्यथा अदालत सख्त रुख अपना सकती है।
फिलहाल, याचिका वापस लिए जाने के साथ यह मामला समाप्त हो गया है। हालांकि, अदालत की टिप्पणी ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक व्यवस्था में प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है और नियमों की अनदेखी पर दंडात्मक कार्रवाई संभव है।
यह मामला पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़े एक पूर्व निर्णय को चुनौती देने से संबंधित था। जयराम रमेश ने रिट याचिका के माध्यम से अदालत के पुराने फैसले की समीक्षा की मांग की थी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा कि जब फैसले के खिलाफ पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका दायर करने का प्रावधान उपलब्ध है, तो सीधे रिट याचिका क्यों दाखिल की गई।
पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में निर्धारित उपायों का पालन आवश्यक है। अदालत ने कहा कि रिव्यू याचिका दाखिल किए बिना सीधे रिट के जरिए फैसले की समीक्षा मांगना उचित नहीं है। यदि हर पक्षकार इस तरह से अलग रास्ता अपनाने लगे तो न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जयराम रमेश के वकील से कहा कि प्रक्रिया की अनदेखी कर याचिका दाखिल करना गंभीर विषय है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि इस प्रकार की अपीलें जारी रहीं तो याचिकाकर्ता पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद जयराम रमेश की ओर से याचिका वापस लेने की इच्छा जताई गई। अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह रुख न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है। न्यायालय ने यह संदेश दिया है कि उपलब्ध वैधानिक उपायों को नजरअंदाज कर वैकल्पिक रास्ता अपनाना स्वीकार्य नहीं होगा।
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि शीर्ष अदालत प्रक्रियात्मक अनुशासन को लेकर सख्त है। किसी भी फैसले के खिलाफ निर्धारित कानूनी उपायों का पालन करना अनिवार्य है, अन्यथा अदालत सख्त रुख अपना सकती है।
फिलहाल, याचिका वापस लिए जाने के साथ यह मामला समाप्त हो गया है। हालांकि, अदालत की टिप्पणी ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक व्यवस्था में प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है और नियमों की अनदेखी पर दंडात्मक कार्रवाई संभव है।