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सात अधिकारी निलंबित
विधानसभा चुनाव से पहले आयोग की बड़ी कार्रवाई
बंगाल चुनाव से पहले सात अधिकारियों पर गिरी गाज, आयोग का सख्त कदम
16 Feb 2026, 12:43 PM
West Bengal -
Kolkata
Reporter :
Mahesh Sharma
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Kolkata पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों पर चुनावी ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने और वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। आयोग की इस कार्रवाई से राज्य के प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है।
सूत्रों के अनुसार, चुनावी तैयारियों की समीक्षा के दौरान आयोग को कुछ अधिकारियों के कामकाज को लेकर गंभीर शिकायतें मिली थीं। आरोप था कि संबंधित अधिकारी चुनाव प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने में विफल रहे। कुछ मामलों में अधिकारों के दुरुपयोग की भी बात सामने आई, जिसे आयोग ने गंभीरता से लिया।
इस संदर्भ में Election Commission of India ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ संबंधित कैडर नियंत्रण प्राधिकारियों द्वारा बिना किसी देरी के अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चुनाव आयोग का यह कदम ऐसे समय आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। ऐसे माहौल में आयोग की यह कार्रवाई यह संदेश देने के तौर पर देखी जा रही है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के दौरान अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। मतदान की तैयारी, मतदाता सूची का प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आचार संहिता के पालन जैसे कई संवेदनशील कार्य उन्हीं के जिम्मे होते हैं। ऐसे में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात की आशंका होती है, तो यह पूरे चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि संबंधित विभागों में आंतरिक जांच की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। निलंबित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, चुनाव आयोग की यह कार्रवाई आगामी चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे स्पष्ट संकेत मिला है कि चुनावी कर्तव्यों में किसी भी तरह की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई तय है।
सूत्रों के अनुसार, चुनावी तैयारियों की समीक्षा के दौरान आयोग को कुछ अधिकारियों के कामकाज को लेकर गंभीर शिकायतें मिली थीं। आरोप था कि संबंधित अधिकारी चुनाव प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने में विफल रहे। कुछ मामलों में अधिकारों के दुरुपयोग की भी बात सामने आई, जिसे आयोग ने गंभीरता से लिया।
इस संदर्भ में Election Commission of India ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ संबंधित कैडर नियंत्रण प्राधिकारियों द्वारा बिना किसी देरी के अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चुनाव आयोग का यह कदम ऐसे समय आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। ऐसे माहौल में आयोग की यह कार्रवाई यह संदेश देने के तौर पर देखी जा रही है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के दौरान अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। मतदान की तैयारी, मतदाता सूची का प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आचार संहिता के पालन जैसे कई संवेदनशील कार्य उन्हीं के जिम्मे होते हैं। ऐसे में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात की आशंका होती है, तो यह पूरे चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि संबंधित विभागों में आंतरिक जांच की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। निलंबित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, चुनाव आयोग की यह कार्रवाई आगामी चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे स्पष्ट संकेत मिला है कि चुनावी कर्तव्यों में किसी भी तरह की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई तय है।