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चुनावी रणनीति पर चर्चा
विधानसभा चुनाव से पहले अहम रणनीतिक बैठक
लखनऊ में मोहन भागवत और योगी की बैठक, विधानसभा चुनाव रणनीति पर मंथन
18 Feb 2026, 12:25 PM Uttar Pradesh - Lucknow
Reporter : Mahesh Sharma
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Lucknow रायपुर। छत्तीसगढ़ में रेवेन्यू इंस्पेक्टर (आरआई) विभागीय परीक्षा लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र को लीक कर करीब 100 अभ्यर्थियों को कथित तौर पर होटल में ठहराकर सवाल रटवाए गए थे। इस मामले में Economic Offences Wing (EOW) और Anti-Corruption Bureau (ACB) ने विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है।

जांच के अनुसार 7 जनवरी 2024 को आयोजित होने वाली आरआई परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र से समझौता कर लिया गया था। आरोप है कि दलालों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से प्रश्नपत्र चुनिंदा लोगों तक पहुंचाया गया। इन अभ्यर्थियों को कथित रूप से एक होटल में इकट्ठा किया गया, जहां उन्हें संभावित प्रश्नों के उत्तर याद करवाए गए।

एजेंसियों का कहना है कि उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने से पहले लिखित नोट्स नष्ट करने के निर्देश भी दिए गए थे, ताकि कोई सबूत न बचे। हालांकि, डिजिटल साक्ष्यों ने पूरे षड्यंत्र की परतें खोल दीं। जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल चैट और लोकेशन डेटा का विश्लेषण किया गया, जिससे परीक्षा से एक रात पहले आरोपियों और अभ्यर्थियों के बीच लगातार संपर्क की पुष्टि हुई।

चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि कुछ अभ्यर्थियों को विशेष रूप से चयनित कर कथित ‘ट्रेनिंग सेशन’ दिया गया था। जांच टीम का दावा है कि होटल बुकिंग, भुगतान के रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से प्राप्त डेटा ने केस को मजबूत आधार दिया है।

मामले में शामिल अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका की भी विस्तार से जांच की गई है। एजेंसियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को गंभीर रूप से प्रभावित किया। कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कुछ अन्य से पूछताछ जारी है।

राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी सुरक्षा उपाय और निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।

इस खुलासे के बाद अभ्यर्थियों और आम जनता में आक्रोश देखा जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल फोरेंसिक जांच ने ऐसे मामलों में सच्चाई उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

फिलहाल, अदालत में मामले की सुनवाई की तैयारी चल रही है। जांच एजेंसियां दावा कर रही हैं कि उनके पास पर्याप्त सबूत हैं, जिससे दोषियों को सजा दिलाई जा सकेगी। यह मामला परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी परीक्षा बन गया है।