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मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पुलिस लाठीचार्ज और एसएसपी अविनाश पांडेय पर हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी को पीटने के आरोप का मामला अब अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंच गया है। एडवोकेट मनोज कुमार ने आयोग से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई थी।
बुधवार को हुए प्रदर्शन के दौरान सामने आए उस वीडियो को आधार बनाकर शिकायत भेजी गई है, जिसमें एसएसपी बंदी वाहन के पास एक हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया, लाठीचार्ज किया और हिरासत में लिए गए लोगों के साथ मारपीट की। इसे अनुसूचित जाति समुदाय के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा मामला बताते हुए राष्ट्रीय और उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
ललिता हत्याकांड को लेकर हुआ था प्रदर्शन
बुधवार को ललिता गौतम हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग मेरठ कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। पुलिस ने भीड़ बढ़ने पर कलेक्ट्रेट का मुख्य गेट बंद कर दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और कई घंटे तक जाम लगा रहा। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक के बाद बल प्रयोग किया गया तथा कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
पहले ही दर्ज हो चुका है मुकदमा, 7 आरोपी गिरफ्तार
बवाल के बाद पुलिस ने 13 नामजद और 25 से 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अन्य की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। घटना में 11 पुलिसकर्मियों के घायल होने का भी दावा किया गया है।
सोशल मीडिया पर दो धड़ों में बंटी राय
घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। एक पक्ष एसएसपी की कार्रवाई को तानाशाही और अत्यधिक बल प्रयोग बताते हुए इसकी आलोचना कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कार्रवाई को उचित ठहरा रहा है। वायरल वीडियो और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।
आगे क्या होगा?
अब मामला अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंचने के बाद आयोग शिकायत पर संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर सकता है। वहीं पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम के वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है तथा कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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