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RSS-BJP संबंधों पर बयान
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दिया अहम भाषण
भागवत बोले- बीजेपी का रिमोट RSS नहीं, UGC मुद्दे पर संयम जरूरी
19 Feb 2026, 11:07 AM
Uttar Pradesh -
Lucknow
Reporter :
Mahesh Sharma
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Lucknow राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों के तहत लखनऊ प्रवास पर पहुंचे संघ प्रमुख Mohan Bhagwat ने संगठन और राजनीति के रिश्तों पर अहम टिप्पणी की। राजधानी के Indira Gandhi Pratishthan में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट कहा कि Rashtriya Swayamsevak Sangh किसी भी राजनीतिक दल का “रिमोट कंट्रोल” नहीं है।
उन्होंने कहा कि संघ एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जिसका उद्देश्य समाज का संगठन और राष्ट्र निर्माण है। राजनीतिक दल अपने निर्णय स्वयं लेते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने Bharatiya Janata Party का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी के फैसले उसके अपने मंचों पर होते हैं और संघ का काम समाज के बीच वैचारिक जागरूकता बढ़ाना है।
भागवत ने हिंदू समाज की एकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज में अपार शक्ति है, लेकिन वह बंटा हुआ है और स्वार्थों में उलझा है। यदि समाज संगठित हो जाए तो देश की दिशा और दशा बदल सकती है। उन्होंने सामाजिक समरसता, सहयोग और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े हालिया दिशा-निर्देशों पर भी सवाल उठे। इस पर संघ प्रमुख ने संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए उस पर सार्वजनिक बहस या टिप्पणी से बचना उचित है। उन्होंने संकेत दिया कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता और संवैधानिक मर्यादा का पालन आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भागवत का यह बयान संगठन और सरकार के रिश्तों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच महत्वपूर्ण है। समय-समय पर विपक्ष यह आरोप लगाता रहा है कि संघ का सरकार पर प्रभाव है। ऐसे में संघ प्रमुख की यह टिप्पणी स्पष्ट संदेश देने वाली मानी जा रही है।
शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में संघ द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लखनऊ में हुआ यह आयोजन भी उसी श्रृंखला का हिस्सा था, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कुल मिलाकर, मोहन भागवत का यह संबोधन सामाजिक एकता, संगठन की भूमिका और शिक्षा नीति जैसे विषयों पर संतुलित दृष्टिकोण पेश करने वाला रहा। उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।
उन्होंने कहा कि संघ एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जिसका उद्देश्य समाज का संगठन और राष्ट्र निर्माण है। राजनीतिक दल अपने निर्णय स्वयं लेते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने Bharatiya Janata Party का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी के फैसले उसके अपने मंचों पर होते हैं और संघ का काम समाज के बीच वैचारिक जागरूकता बढ़ाना है।
भागवत ने हिंदू समाज की एकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज में अपार शक्ति है, लेकिन वह बंटा हुआ है और स्वार्थों में उलझा है। यदि समाज संगठित हो जाए तो देश की दिशा और दशा बदल सकती है। उन्होंने सामाजिक समरसता, सहयोग और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े हालिया दिशा-निर्देशों पर भी सवाल उठे। इस पर संघ प्रमुख ने संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए उस पर सार्वजनिक बहस या टिप्पणी से बचना उचित है। उन्होंने संकेत दिया कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता और संवैधानिक मर्यादा का पालन आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भागवत का यह बयान संगठन और सरकार के रिश्तों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच महत्वपूर्ण है। समय-समय पर विपक्ष यह आरोप लगाता रहा है कि संघ का सरकार पर प्रभाव है। ऐसे में संघ प्रमुख की यह टिप्पणी स्पष्ट संदेश देने वाली मानी जा रही है।
शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में संघ द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लखनऊ में हुआ यह आयोजन भी उसी श्रृंखला का हिस्सा था, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कुल मिलाकर, मोहन भागवत का यह संबोधन सामाजिक एकता, संगठन की भूमिका और शिक्षा नीति जैसे विषयों पर संतुलित दृष्टिकोण पेश करने वाला रहा। उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।