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एमपी विधानसभा में कुत्ता विवाद
आवारा कुत्तों का हमला, जनता में चिंता बढ़ी।
एमपी विधानसभा में आवारा कुत्तों को लेकर BJP और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी बहस
18 Feb 2026, 01:10 PM
Madhya Pradesh -
Bhopal
Reporter :
Mahesh Sharma
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Bhopal मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर गहन चर्चा हुई। राजधानी भोपाल सहित पूरे राज्य में आवारा कुत्तों का आतंक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभरता जा रहा है। कांग्रेस के विधायक आतिफ अकील और राजन मंडलोई ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से यह मुद्दा उठाया और कहा कि आम जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
कांग्रेस विधायक ने बताया कि आवारा कुत्तों द्वारा किए गए हमले सिर्फ डर और असुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह गंभीर रूप से डेंगू, रेबीज और अन्य संक्रामक रोगों के प्रसार का कारण बन सकते हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसे क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ाए और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
इस मुद्दे पर BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने एक तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि "कुत्तों की क्या ज़रूरत है?" उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब तक हर भारतीय के पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है, तब तक आवारा कुत्तों को पालने या उनकी सुरक्षा पर ध्यान क्यों दिया जाए। उनके इस बयान ने विधानसभा में हलचल पैदा कर दी।
वहीं, बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने नरम रुख अपनाते हुए कहा कि "कुत्ते इंसानों के शत्रु नहीं हैं।" उन्होंने नसबंदी और नियंत्रण जैसी मानवीय विधियों के जरिए इस समस्या को हल करने की बात कही। सरकार ने आश्वासन दिया कि आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएंगे और नसबंदी कार्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
इस चर्चा के दौरान कई पशु अधिकार संगठन भी चिंता व्यक्त करते दिखाई दिए। उनका कहना है कि कुत्तों को मारने या खत्म करने के बजाय नसबंदी, टीकाकरण और सुरक्षित शेल्टर प्रदान करना ही दीर्घकालिक समाधान है। सामाजिक मीडिया पर इस विषय पर जनता और नेताओं के बीच तीखी बहस चल रही है, जिसमें दोनों पक्षों के समर्थक अपनी-अपनी राय साझा कर रहे हैं।
भले ही विधानसभा में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी हुई, लेकिन अंततः यह स्पष्ट हुआ कि आवारा कुत्तों की समस्या केवल शहरों की सफाई और सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, पशु अधिकार और नीति निर्माण का संगम है। सरकार ने सभी दलों से सहयोग का आग्रह किया और आश्वासन दिया कि राज्यभर में नियंत्रण और निगरानी कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
भोपाल समेत मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशासन ने कहा कि वह न केवल नसबंदी बल्कि जागरूकता अभियान भी चलाएगा ताकि नागरिक अपने और पशुओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित कर सकें।
कांग्रेस विधायक ने बताया कि आवारा कुत्तों द्वारा किए गए हमले सिर्फ डर और असुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह गंभीर रूप से डेंगू, रेबीज और अन्य संक्रामक रोगों के प्रसार का कारण बन सकते हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसे क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ाए और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
इस मुद्दे पर BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने एक तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि "कुत्तों की क्या ज़रूरत है?" उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब तक हर भारतीय के पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है, तब तक आवारा कुत्तों को पालने या उनकी सुरक्षा पर ध्यान क्यों दिया जाए। उनके इस बयान ने विधानसभा में हलचल पैदा कर दी।
वहीं, बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने नरम रुख अपनाते हुए कहा कि "कुत्ते इंसानों के शत्रु नहीं हैं।" उन्होंने नसबंदी और नियंत्रण जैसी मानवीय विधियों के जरिए इस समस्या को हल करने की बात कही। सरकार ने आश्वासन दिया कि आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएंगे और नसबंदी कार्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
इस चर्चा के दौरान कई पशु अधिकार संगठन भी चिंता व्यक्त करते दिखाई दिए। उनका कहना है कि कुत्तों को मारने या खत्म करने के बजाय नसबंदी, टीकाकरण और सुरक्षित शेल्टर प्रदान करना ही दीर्घकालिक समाधान है। सामाजिक मीडिया पर इस विषय पर जनता और नेताओं के बीच तीखी बहस चल रही है, जिसमें दोनों पक्षों के समर्थक अपनी-अपनी राय साझा कर रहे हैं।
भले ही विधानसभा में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी हुई, लेकिन अंततः यह स्पष्ट हुआ कि आवारा कुत्तों की समस्या केवल शहरों की सफाई और सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, पशु अधिकार और नीति निर्माण का संगम है। सरकार ने सभी दलों से सहयोग का आग्रह किया और आश्वासन दिया कि राज्यभर में नियंत्रण और निगरानी कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
भोपाल समेत मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशासन ने कहा कि वह न केवल नसबंदी बल्कि जागरूकता अभियान भी चलाएगा ताकि नागरिक अपने और पशुओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित कर सकें।