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अंतरिम सरकार के विवादित फैसले
चुनाव से पहले लिए फैसलों ने नई सरकार घेर ली
यूनुस के फैसलों से घिरे तारिक रहमान, संविधान और ट्रेड डील बड़ी चुनौती
19 Feb 2026, 10:27 AM
Dhaka District -
Dhaka
Reporter :
Mahesh Sharma
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Dhaka बांग्लादेश की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। डेढ़ साल तक अंतरिम सरकार चलाने के बाद Muhammad Yunus ने सत्ता से विदाई ली, लेकिन जाते-जाते ऐसे फैसले कर गए जिनसे नई सरकार के लिए सियासी चुनौतियां बढ़ गई हैं। नए प्रधानमंत्री Tarique Rahman के सामने अब संवैधानिक सुधार और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते जैसे दो बड़े मुद्दे खड़े हैं।
सबसे पहला सवाल संविधान सुधार का है। अंतरिम सरकार ने चुनाव के साथ संवैधानिक संशोधन को जोड़ने की रणनीति अपनाई थी। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि क्या यह कदम चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने के लिए उठाया गया था। अब नई सरकार को तय करना है कि वह इस जनमत संग्रह को आगे बढ़ाए या इसमें बदलाव करे।
दूसरी बड़ी चुनौती अमेरिका के साथ हुआ व्यापार समझौता है। चुनाव से ठीक पहले तेज़ी से आगे बढ़ाई गई इस डील को लेकर आलोचक सवाल उठा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि आयातित कच्चे माल की शर्तों में बदलाव हुआ या अमेरिकी ब्रांड्स को उत्पादन नियंत्रण में अधिक अधिकार मिले, तो बांग्लादेश के टेक्सटाइल उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है। चूंकि देश की अर्थव्यवस्था में रेडीमेड गारमेंट सेक्टर की अहम भूमिका है, इसलिए यह मुद्दा बेहद संवेदनशील बन गया है।
राजनीतिक स्तर पर भी हालात आसान नहीं हैं। Bangladesh Nationalist Party के नेतृत्व में बनी सरकार पर विपक्षी दल, खासकर Jamaat-e-Islami Bangladesh और छात्र संगठन नेशनल सिटिजन्स पार्टी, लगातार दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि संवैधानिक सुधारों को अधूरा नहीं छोड़ा जा सकता।
तारिक रहमान के सामने फिलहाल तीन विकल्प माने जा रहे हैं। पहला, वह ट्रेड डील और संवैधानिक फैसलों को जस का तस स्वीकार कर लें और अंतरिम सरकार के निर्णयों को राष्ट्रीय हित में बताया जाए। दूसरा, वह इन फैसलों को पूरी तरह पलट दें, जिससे अमेरिका समेत अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ तनाव की स्थिति बन सकती है। तीसरा विकल्प आंशिक संशोधन का है, जिसमें कूटनीतिक संतुलन बनाते हुए कुछ शर्तों पर पुनर्विचार किया जाए।
विश्लेषकों का मानना है कि तीसरा रास्ता व्यावहारिक हो सकता है, लेकिन इसके लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलित संवाद की जरूरत होगी।
स्पष्ट है कि बांग्लादेश की नई सरकार के लिए शुरुआती दिन आसान नहीं हैं। संवैधानिक सुधार और व्यापार समझौते जैसे मुद्दे आने वाले समय में देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों की दिशा तय करेंगे।
सबसे पहला सवाल संविधान सुधार का है। अंतरिम सरकार ने चुनाव के साथ संवैधानिक संशोधन को जोड़ने की रणनीति अपनाई थी। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि क्या यह कदम चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने के लिए उठाया गया था। अब नई सरकार को तय करना है कि वह इस जनमत संग्रह को आगे बढ़ाए या इसमें बदलाव करे।
दूसरी बड़ी चुनौती अमेरिका के साथ हुआ व्यापार समझौता है। चुनाव से ठीक पहले तेज़ी से आगे बढ़ाई गई इस डील को लेकर आलोचक सवाल उठा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि आयातित कच्चे माल की शर्तों में बदलाव हुआ या अमेरिकी ब्रांड्स को उत्पादन नियंत्रण में अधिक अधिकार मिले, तो बांग्लादेश के टेक्सटाइल उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है। चूंकि देश की अर्थव्यवस्था में रेडीमेड गारमेंट सेक्टर की अहम भूमिका है, इसलिए यह मुद्दा बेहद संवेदनशील बन गया है।
राजनीतिक स्तर पर भी हालात आसान नहीं हैं। Bangladesh Nationalist Party के नेतृत्व में बनी सरकार पर विपक्षी दल, खासकर Jamaat-e-Islami Bangladesh और छात्र संगठन नेशनल सिटिजन्स पार्टी, लगातार दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि संवैधानिक सुधारों को अधूरा नहीं छोड़ा जा सकता।
तारिक रहमान के सामने फिलहाल तीन विकल्प माने जा रहे हैं। पहला, वह ट्रेड डील और संवैधानिक फैसलों को जस का तस स्वीकार कर लें और अंतरिम सरकार के निर्णयों को राष्ट्रीय हित में बताया जाए। दूसरा, वह इन फैसलों को पूरी तरह पलट दें, जिससे अमेरिका समेत अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ तनाव की स्थिति बन सकती है। तीसरा विकल्प आंशिक संशोधन का है, जिसमें कूटनीतिक संतुलन बनाते हुए कुछ शर्तों पर पुनर्विचार किया जाए।
विश्लेषकों का मानना है कि तीसरा रास्ता व्यावहारिक हो सकता है, लेकिन इसके लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलित संवाद की जरूरत होगी।
स्पष्ट है कि बांग्लादेश की नई सरकार के लिए शुरुआती दिन आसान नहीं हैं। संवैधानिक सुधार और व्यापार समझौते जैसे मुद्दे आने वाले समय में देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों की दिशा तय करेंगे।