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मैं 2019 बैच का IAS हूं’
मैं 2019 बैच का IAS हूं’… MP के मंत्रालय पहुंचा फर्जी अधिकारी, कहा- आप पोस्टिंग देना भूल गए
17 Feb 2026, 08:52 AM Madhya Pradesh - Bhopal
Reporter : Arun Mishra
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Bhopal भोपाल स्थित सामान्य प्रशासन विभाग में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक ने खुद को 2019 बैच का IAS बताया. युवक ने विभाग में मौजूद एक अधिकारी से कहा कि आप मुझे पोस्टिंग देना भूल गए. बाद में जांच के दौरान पता चला वह तो फर्जी IAS है.

राजधानी भोपाल स्थित मंत्रालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब हाई सिक्योरिटी के बीच एक युवक खुद को IAS अधिकारी बताकर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की शाखा तक पहुंच गया. युवक ने दावा किया कि वह 2019 बैच का IAS है और अपनी पदस्थापना व तबादले के संबंध में अधिकारियों से मिलने आया है. युवक ने अपना नाम योगेंद्र सिंह चौहान बताया और कहा कि GDA उसकी पोस्टिंग के आदेश जारी करना भूल गया है. इसलिए वह स्वयं मंत्रालय पहुंचा है. उसने यह भी दावा किया कि वह इंदौर में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ है.

वहीं GDA के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने जब उससे विस्तार से पूछताछ की तो उसके जवाबों में विरोधाभास सामने आने लगे. उसने कहा कि वह पूर्व इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह के साथ काम कर चुका है और वे उसे पसंद करते थे. साथ ही उसने पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह का नाम लेते हुए कहा कि वे भी उसे जानते हैं और जरूरत पड़ने पर बात करा सकता है. जब उससे सुरक्षाकर्मी के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि कलेक्टर ने उसे अपने पास रख लिया है. यह जवाब सुनते ही अधिकारियों का शक और गहरा गया.

लिस्ट में नहीं मिला नाम
सुरक्षा अधिकारियों ने उसे 2019 बैच के IAS अधिकारियों की सूची दिखाई, जिसमें उसका नाम नहीं था. पूछताछ के दौरान उसके पास कोई पहचान पत्र या नियुक्ति से जुड़ा दस्तावेज भी नहीं मिले. उसकी गतिविधियां और व्यवहार भी संदिग्ध पाए गए. मंत्रालय के सुरक्षा अधिकारी अविनाश शर्मा ने बताया कि युवक से पूछताछ के दौरान वह मानसिक रूप से अस्थिर प्रतीत हुआ. वह बिना किसी चिंता के एकटक सुरक्षाकर्मियों को देखता रहा. बाद में उसके परिजनों को बुलाया गया. परिजनों ने बताया कि उसका उपचार चल रहा है.

परिजनों के हवाले किया गया
स्थिति को देखते हुए उसके खिलाफ कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं की गई और आवश्यक समझाइश के बाद उसे परिजनों के हवाले कर दिया गया. साथ ही हिदायत दी गई कि उपचार के दौरान उसे अकेले बाहर न जाने दिया जाए. घटना ने मंत्रालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं कि आखिर एक व्यक्ति बिना वैध पहचान के GDA शाखा तक कैसे पहुंच गया?