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ईडी ने ठिकानों पर छापा
विदेशी नागरिकता छिपाकर करोड़ों लेनदेन का आरोप
ब्रिटिश नागरिकता के बावजूद यूपी चुनाव में वोटिंग, मौलाना शम्सुल हुदा खान पर ईडी की बड़ी कार्रवाई
12 Feb 2026, 04:32 PM
Uttar Pradesh -
Sant Kabir Nagar
Reporter :
Mahesh Sharma
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Sant Kabir Nagar प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की लखनऊ इकाई ने 11 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर और आजमगढ़ में मौलाना शम्सुल हुदा खान से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित अवैध वित्तीय लेनदेन, विदेशी नागरिकता छिपाने और सरकारी लाभ उठाने के आरोपों के तहत की गई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, शम्सुल हुदा खान वर्ष 2013 में ब्रिटिश नागरिक बन चुका था। इसके बावजूद वह 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदान करने के लिए विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम से भारत आया। एजेंसियों का दावा है कि उसने अपनी विदेशी नागरिकता को संबंधित विभागों से छिपाया और 2017 तक सरकारी वेतन तथा 2023 तक पेंशन का लाभ प्राप्त करता रहा।
ईडी का आरोप है कि खान ने एनजीओ और व्यक्तिगत बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन किया। प्रारंभिक जांच में 2013 से 2017 के बीच संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के संकेत मिले हैं। एजेंसी को शक है कि इन लेनदेन का संबंध विदेशी स्रोतों से प्राप्त धन और उसके उपयोग से जुड़ा हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। ईडी यह भी जांच कर रही है कि क्या इन फंड्स का उपयोग किसी विशेष उद्देश्य या नेटवर्क के लिए किया गया। अधिकारियों का कहना है कि लेनदेन की कुल राशि करोड़ों में है और विस्तृत ऑडिट के बाद वास्तविक आंकड़े स्पष्ट होंगे।
जांच में यह भी सामने आया है कि शम्सुल हुदा खान ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों की यात्राएं की थीं। इन यात्राओं और वित्तीय गतिविधियों के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसियों के अनुसार, लगभग 33 करोड़ रुपये की संपत्तियों और निवेश का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है, जिसकी वैधता की जांच जारी है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विदेशी नागरिकता छिपाकर सरकारी लाभ लेने के आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। साथ ही, मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई संभव है।
फिलहाल ईडी की छापेमारी और पूछताछ की प्रक्रिया जारी है। एजेंसी संबंधित विभागों और बैंकिंग संस्थानों से भी जानकारी एकत्र कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
मौलाना शम्सुल हुदा खान का मामला अब केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विदेशी नागरिकता, चुनावी प्रक्रिया और आर्थिक पारदर्शिता से जुड़े व्यापक सवाल भी खड़े कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, शम्सुल हुदा खान वर्ष 2013 में ब्रिटिश नागरिक बन चुका था। इसके बावजूद वह 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदान करने के लिए विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम से भारत आया। एजेंसियों का दावा है कि उसने अपनी विदेशी नागरिकता को संबंधित विभागों से छिपाया और 2017 तक सरकारी वेतन तथा 2023 तक पेंशन का लाभ प्राप्त करता रहा।
ईडी का आरोप है कि खान ने एनजीओ और व्यक्तिगत बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन किया। प्रारंभिक जांच में 2013 से 2017 के बीच संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के संकेत मिले हैं। एजेंसी को शक है कि इन लेनदेन का संबंध विदेशी स्रोतों से प्राप्त धन और उसके उपयोग से जुड़ा हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। ईडी यह भी जांच कर रही है कि क्या इन फंड्स का उपयोग किसी विशेष उद्देश्य या नेटवर्क के लिए किया गया। अधिकारियों का कहना है कि लेनदेन की कुल राशि करोड़ों में है और विस्तृत ऑडिट के बाद वास्तविक आंकड़े स्पष्ट होंगे।
जांच में यह भी सामने आया है कि शम्सुल हुदा खान ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों की यात्राएं की थीं। इन यात्राओं और वित्तीय गतिविधियों के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसियों के अनुसार, लगभग 33 करोड़ रुपये की संपत्तियों और निवेश का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है, जिसकी वैधता की जांच जारी है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विदेशी नागरिकता छिपाकर सरकारी लाभ लेने के आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। साथ ही, मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई संभव है।
फिलहाल ईडी की छापेमारी और पूछताछ की प्रक्रिया जारी है। एजेंसी संबंधित विभागों और बैंकिंग संस्थानों से भी जानकारी एकत्र कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
मौलाना शम्सुल हुदा खान का मामला अब केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विदेशी नागरिकता, चुनावी प्रक्रिया और आर्थिक पारदर्शिता से जुड़े व्यापक सवाल भी खड़े कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।