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DAC की बड़ी मंजूरी
रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में अहम फैसला लिया गया
114 नए राफेल विमानों की खरीद को रक्षा परिषद की हरी झंडी, वायुसेना की ताकत बढ़ेगी
12 Feb 2026, 03:13 PM
Uttar Pradesh -
Lucknow
Reporter :
Mahesh Sharma
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Lucknow भारत की वायु शक्ति को और सुदृढ़ करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले को भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। यह अब तक के बड़े रक्षा सौदों में से एक हो सकता है। DAC की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) के पास जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल देश की सर्वोच्च रक्षा खरीद निर्णय लेने वाली संस्था है। इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं और इसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। परिषद का काम नए हथियारों, सैन्य उपकरणों और विमानों की खरीद को मंजूरी देना, बजट आवंटन के आधार पर प्राथमिकताएं तय करना और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देना है।
भारत पहले ही वर्ष 2016 में फ्रांस से 36 राफेल विमानों का सौदा कर चुका है, जिसकी लागत लगभग 59,000 करोड़ रुपये थी। ये सभी विमान 2022 तक भारतीय वायुसेना को मिल चुके हैं और अंबाला तथा हाशिमारा एयरबेस पर तैनात हैं। नए 114 विमानों की खरीद से वायुसेना के घटते स्क्वाड्रन स्तर को संतुलित करने में मदद मिलेगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल की उन्नत तकनीक, लंबी मारक क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणाली भारतीय वायुसेना को सामरिक बढ़त प्रदान करेगी। वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय संतुलन को देखते हुए यह कदम रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
हालांकि, इतना बड़ा सौदा विदेशी कंपनी के साथ होने के कारण आत्मनिर्भरता को लेकर भी चर्चा हो रही है। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया में देश में निर्माण और तकनीक हस्तांतरण पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूती मिले।
अब निगाहें CCS के फैसले पर टिकी हैं। यदि वहां से अंतिम मंजूरी मिलती है, तो फ्रांस की कंपनी दसॉ (Dassault Aviation) के साथ औपचारिक अनुबंध प्रक्रिया शुरू होगी।
कुल मिलाकर, 114 राफेल विमानों की संभावित खरीद भारतीय वायुसेना को नई मजबूती दे सकती है और रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई पर पहुंचा सकती है। यह फैसला आने वाले वर्षों में देश की सामरिक स्थिति को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। यह अब तक के बड़े रक्षा सौदों में से एक हो सकता है। DAC की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) के पास जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल देश की सर्वोच्च रक्षा खरीद निर्णय लेने वाली संस्था है। इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं और इसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। परिषद का काम नए हथियारों, सैन्य उपकरणों और विमानों की खरीद को मंजूरी देना, बजट आवंटन के आधार पर प्राथमिकताएं तय करना और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देना है।
भारत पहले ही वर्ष 2016 में फ्रांस से 36 राफेल विमानों का सौदा कर चुका है, जिसकी लागत लगभग 59,000 करोड़ रुपये थी। ये सभी विमान 2022 तक भारतीय वायुसेना को मिल चुके हैं और अंबाला तथा हाशिमारा एयरबेस पर तैनात हैं। नए 114 विमानों की खरीद से वायुसेना के घटते स्क्वाड्रन स्तर को संतुलित करने में मदद मिलेगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल की उन्नत तकनीक, लंबी मारक क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणाली भारतीय वायुसेना को सामरिक बढ़त प्रदान करेगी। वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय संतुलन को देखते हुए यह कदम रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
हालांकि, इतना बड़ा सौदा विदेशी कंपनी के साथ होने के कारण आत्मनिर्भरता को लेकर भी चर्चा हो रही है। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया में देश में निर्माण और तकनीक हस्तांतरण पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूती मिले।
अब निगाहें CCS के फैसले पर टिकी हैं। यदि वहां से अंतिम मंजूरी मिलती है, तो फ्रांस की कंपनी दसॉ (Dassault Aviation) के साथ औपचारिक अनुबंध प्रक्रिया शुरू होगी।
कुल मिलाकर, 114 राफेल विमानों की संभावित खरीद भारतीय वायुसेना को नई मजबूती दे सकती है और रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई पर पहुंचा सकती है। यह फैसला आने वाले वर्षों में देश की सामरिक स्थिति को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।