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होलाष्टक तिथि को लेकर भ्रम
फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है होलाष्टक
होलाष्टक 2026 कब से शुरू, 24 या 25 फरवरी पर संशय, जानें नियम
18 Feb 2026, 12:19 PM Delhi - New Delhi
Reporter : Mahesh Sharma
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New Delhi रंगों के पावन पर्व होली से पहले पड़ने वाले होलाष्टक को लेकर इस वर्ष तिथि पर हल्का संशय बना हुआ है। लोगों के मन में सवाल है कि वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होगा या 25 फरवरी से। पंचांग के अनुसार होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि से होती है, जो होली से ठीक आठ दिन पूर्व पड़ती है।

इस वर्ष 3 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। ऐसे में अष्टमी तिथि के प्रारंभ समय के आधार पर होलाष्टक 24 या 25 फरवरी से प्रभावी माना जाएगा। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार जिस दिन अष्टमी तिथि प्रातःकाल में विद्यमान रहती है, उसी दिन से होलाष्टक मान्य होता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार होलाष्टक के आठ दिनों को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इन दिनों में विशेष रूप से विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य मांगलिक संस्कारों से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस अवधि में ग्रहों की स्थिति उग्र रहती है, जिससे नए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं।

शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक की अवधि में भगवान विष्णु की उपासना, दान-पुण्य और संयम का विशेष महत्व है। भक्तजन इस दौरान भजन-कीर्तन, व्रत और ध्यान में समय बिताते हैं। कई स्थानों पर होलाष्टक लगते ही मंदिरों में विशेष अनुष्ठान भी प्रारंभ हो जाते हैं।

इन आठ दिनों में जिन सात प्रमुख कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है, उनमें विवाह और सगाई तय करना, नई संपत्ति खरीदना, घर की नींव रखना, नया व्यवसाय शुरू करना, बहू-बेटी की विदाई, यज्ञोपवीत संस्कार और बड़े निवेश संबंधी निर्णय शामिल हैं। हालांकि, अत्यावश्यक परिस्थितियों में विद्वान पंडित की सलाह से कार्य किए जा सकते हैं।

धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि होलाष्टक का उद्देश्य लोगों को संयम, साधना और आत्मचिंतन की ओर प्रेरित करना है। यह अवधि आध्यात्मिक तैयारी का समय मानी जाती है, जिसके बाद होलिका दहन और रंगोत्सव के साथ उल्लास का वातावरण बनता है।

होली को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन की अग्नि में नकारात्मकता के दहन का संदेश निहित है। इसके अगले दिन रंगों का उत्सव आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करता है।

इस प्रकार, होलाष्टक 2026 की सटीक तिथि पंचांग के आधार पर निर्धारित होगी, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह आठ दिन सावधानी और श्रद्धा के साथ बिताने का संदेश देते हैं।