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छात्राओं की सराहनीय पहल
विद्यार्थियों में पर्यावरण जागरूकता
हैदराबाद के स्कूल ने अफ्रीकी शेर को गोद लेकर वन्यजीव संरक्षण में बढ़ाया कदम
13 Feb 2026, 01:15 PM Telangana - Hyderabad
Reporter : Mahesh Sharma
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Hyderabad हैदराबाद के खैरताबाद क्षेत्र स्थित NASR Girls School ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाते हुए एक अफ्रीकी शेर को गोद लिया है। इस पहल के तहत स्कूल प्रबंधन और छात्राओं ने Nehru Zoological Park को 3 लाख रुपये का योगदान दिया है।

यह पहल चिड़ियाघर की ‘एनिमल अडॉप्शन स्कीम’ के अंतर्गत की गई है, जिसके माध्यम से व्यक्ति या संस्थाएं किसी वन्यजीव की देखभाल के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान कर सकती हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल ने सात वर्षीय अफ्रीकी शेर को गोद लिया है, जिससे उसके भोजन, स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़े खर्चों में सहायता मिलेगी।

बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में NASR Education Society के प्रतिनिधियों ने जू प्रशासन को 3 लाख रुपये का चेक सौंपा। इस अवसर पर सोसाइटी के चेयरमैन नवाब मीर खु्तुबुद्दीन खान सहित अन्य पदाधिकारी और छात्राएं मौजूद रहीं।

स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक सहयोग देना नहीं, बल्कि छात्राओं में पर्यावरणीय जिम्मेदारी और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। उनका मानना है कि जब बच्चे प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़ते हैं, तो वे भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक बनते हैं।

कार्यक्रम के दौरान जू अधिकारियों ने स्कूल की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं। उन्होंने बताया कि पशु गोद लेने की योजना के माध्यम से चिड़ियाघर को अतिरिक्त संसाधन मिलते हैं, जिससे जानवरों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

छात्राओं ने भी इस अवसर पर वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। कई छात्राओं ने कहा कि वे आगे भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेना चाहती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी से संरक्षण अभियान को नई ऊर्जा मिलती है। इस तरह की पहल से बच्चों में संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है।

हैदराबाद का यह कदम अन्य स्कूलों और संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। यदि समाज के विभिन्न वर्ग इस प्रकार आगे आएं, तो वन्यजीवों के संरक्षण के प्रयास और मजबूत हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह पहल न केवल आर्थिक सहयोग का उदाहरण है, बल्कि पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देने वाला सकारात्मक सामाजिक संदेश भी है।