Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
रणनीतिक संदेश की चर्चा
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ स्थित वेस्टर्न कमांड का दौरा किया
पाक सीमा के नजदीक वेस्टर्न कमांड पहुंचे अमेरिकी दूत, सियासी हलकों में तेज बहस
17 Feb 2026, 04:58 PM Chandigarh - Chandigarh
Reporter : Mahesh Sharma
ADVERTISEMENT Sponsored
Ad
Open
Chandigarh पाकिस्तान सीमा के नजदीक स्थित भारतीय सेना की अहम सैन्य संरचना वेस्टर्न कमांड के दौरे को लेकर सियासी हलकों में बहस छिड़ गई है। हाल ही में अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर और अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल जे पापारो ने चंडीगढ़ स्थित भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड का दौरा किया।

वेस्टर्न कमांड भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कमांड में से एक मानी जाती है। इसका दायरा जम्मू-कश्मीर के अखनूर से लेकर पंजाब के फाजिल्का सेक्टर तक फैला हुआ है। यह कमांड 200 से अधिक सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की निगरानी करती है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं।

विपक्ष का कहना है कि भारत को अपनी सामरिक नीतियों में स्वतंत्रता बनाए रखनी चाहिए। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका के साथ अत्यधिक सामरिक निकटता दिखा रही है। इस मुद्दे पर कांग्रेस से जुड़ी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है।

हालांकि, रक्षा विशेषज्ञ इस दौरे को भारत-अमेरिका संबंधों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देख रहे हैं। उनका मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों के बीच अमेरिका भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति में भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उपकरणों की खरीद और खुफिया साझेदारी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हुए हैं। ऐसे में वेस्टर्न कमांड का दौरा इस सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंध पहले जैसे नहीं रहे हैं, जबकि भारत के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी लगातार बढ़ रही है। इस पृष्ठभूमि में यह दौरा एक सामरिक संदेश के रूप में भी देखा जा सकता है।

फिलहाल सरकार की ओर से इसे सामान्य सैन्य कूटनीति का हिस्सा बताया गया है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस पर बहस जारी है कि क्या यह कदम भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को प्रभावित करता है या फिर वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत है। आने वाले समय में इस दौरे के कूटनीतिक प्रभाव स्पष्ट होंगे।