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ड्यूटी पर ASI, दरबार में भावुक क्षण
ड्यूटी निभा रहे ASI की बेटी की बीमारी दरबार में उजागर
ड्यूटी पर तैनात ASI की पीड़ा जान गए धीरेंद्र शास्त्री, बेटी के इलाज की दिलाई उम्मीद
06 Feb 2026, 09:39 AM Madhya Pradesh - Satna
Reporter : Mahesh Sharma
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Satna मध्य प्रदेश के सतना जिले में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक और दरबार चर्चा का विषय बन गया है। इस बार कारण बना एक पुलिस अधिकारी और उसकी निजी पीड़ा, जो ड्यूटी के दौरान बाबा के दरबार में सामने आई। यह घटना न सिर्फ आस्था से जुड़ी रही, बल्कि मानवीय संवेदना और जिम्मेदारी का भी उदाहरण बनी।

सतना के धारकुंडी थाना क्षेत्र में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक (ASI) सुरेंद्र कुमार कथा पंडाल में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। भीड़ नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने में व्यस्त ASI मन ही मन अपनी बेटी की गंभीर बीमारी को लेकर चिंतित थे। उनके अनुसार, वह खुद को यह कहकर समझा रहे थे कि “हम तो ड्यूटी पर हैं, हमारी बात कौन सुनेगा।”

इसी दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने दरबार में बिना किसी पूर्व सूचना के ASI को भीड़ से बुलाया। यह पल ASI के लिए पूरी तरह अप्रत्याशित था। बाबा ने पर्चा पढ़ते हुए जिस समस्या का उल्लेख किया, वह ASI की बेटी की बीमारी से जुड़ा हुआ था। वहां मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर हैरान रह गए।

बताया गया कि धीरेंद्र शास्त्री ने ASI को आश्वासन देते हुए कहा कि आस्था के साथ-साथ चिकित्सा भी जरूरी है। उन्होंने बेटी के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने और अच्छे डॉक्टरों से परामर्श लेने की बात कही। यह संदेश साफ था कि धर्म और विज्ञान को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि पूरक समझा जाना चाहिए।

दरबार में मौजूद श्रद्धालुओं के अनुसार, इस घटना के बाद ASI की आंखें नम हो गईं। ड्यूटी की सख्ती और व्यक्तिगत पीड़ा के बीच यह क्षण भावनात्मक बन गया। कई लोगों ने इसे इंसानियत और संवेदना से भरा अनुभव बताया।

गौरतलब है कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री अक्सर अपनी कथित दिव्य शक्तियों को लेकर चर्चा में रहते हैं। जहां कुछ लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, वहीं उनके समर्थक इसे आस्था का विषय बताते हैं। इस घटना में हालांकि बाबा का रुख संतुलित नजर आया, जिसमें उन्होंने चमत्कार से अधिक जिम्मेदार सोच पर जोर दिया।

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा में है। लोग इसे आस्था, भावना और सामाजिक संदेश से जुड़ी घटना के रूप में देख रहे हैं, जिसने एक बार फिर बागेश्वर धाम के दरबार को सुर्खियों में ला दिया है।