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राज्यसभा में तीखी बहस
भाषण के दौरान जया बच्चन ने टोका
राज्यसभा में तीखी बहस: एंटरटेनमेंट टैक्स मुद्दे पर निर्मला सीतारमण और जया बच्चन आमने-सामने
13 Feb 2026, 12:10 PM
Uttar Pradesh -
Lucknow
Reporter :
Mahesh Sharma
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Lucknow संसद के उच्च सदन राज्यसभा में गुरुवार को उस समय माहौल गरमा गया जब एंटरटेनमेंट टैक्स से जुड़े मुद्दे पर वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman और समाजवादी पार्टी की सांसद Jaya Bachchan के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिली।
दरअसल, वित्त मंत्री सदन में विभिन्न आर्थिक और कर संबंधी मुद्दों पर अपना पक्ष रख रही थीं। इसी दौरान जया बच्चन ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर टैक्स के प्रभाव को लेकर बीच में सवाल उठाया। उनका कहना था कि फिल्म और मनोरंजन उद्योग पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में कर व्यवस्था को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
वित्त मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि वह अपनी बात पूरी कर रही थीं और बीच में नया प्रश्न खड़ा कर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार हर क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाती है और एंटरटेनमेंट सेक्टर के संबंध में भी विस्तृत आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
मंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी सदस्यों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। जया बच्चन अपनी सीट से खड़ी होकर दोबारा बोलने लगीं, जिससे सदन में कुछ समय के लिए व्यवधान की स्थिति बन गई। इस पर सभापति को हस्तक्षेप करना पड़ा और सभी सदस्यों से शांत रहने तथा नियमों का पालन करने की अपील की गई।
घटना के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें मजबूती से रखीं। जहां जया बच्चन ने फिल्म उद्योग के आर्थिक दबावों की बात की, वहीं वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार पारदर्शी कर प्रणाली के माध्यम से संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस केवल कर नीति तक सीमित नहीं थी, बल्कि व्यापक रूप से आर्थिक प्रबंधन और उद्योगों पर सरकारी नीतियों के प्रभाव को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच मतभेद को दर्शाती है।
संसदीय कार्यवाही के दौरान ऐसे टकराव नई बात नहीं हैं, लेकिन यह घटना इसलिए चर्चा में रही क्योंकि इसमें दो प्रमुख हस्तियों के बीच सीधा संवाद और तीखा प्रतिवाद देखने को मिला।
हालांकि बाद में सदन की कार्यवाही सामान्य हुई और वित्त मंत्री ने अपना भाषण जारी रखा। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया कि संसद में नीतिगत मुद्दों पर बहस कितनी गंभीर और कभी-कभी तीखी हो सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि एंटरटेनमेंट टैक्स और अन्य आर्थिक मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच क्या रुख सामने आता है।
दरअसल, वित्त मंत्री सदन में विभिन्न आर्थिक और कर संबंधी मुद्दों पर अपना पक्ष रख रही थीं। इसी दौरान जया बच्चन ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर टैक्स के प्रभाव को लेकर बीच में सवाल उठाया। उनका कहना था कि फिल्म और मनोरंजन उद्योग पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में कर व्यवस्था को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
वित्त मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि वह अपनी बात पूरी कर रही थीं और बीच में नया प्रश्न खड़ा कर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार हर क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाती है और एंटरटेनमेंट सेक्टर के संबंध में भी विस्तृत आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
मंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी सदस्यों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। जया बच्चन अपनी सीट से खड़ी होकर दोबारा बोलने लगीं, जिससे सदन में कुछ समय के लिए व्यवधान की स्थिति बन गई। इस पर सभापति को हस्तक्षेप करना पड़ा और सभी सदस्यों से शांत रहने तथा नियमों का पालन करने की अपील की गई।
घटना के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें मजबूती से रखीं। जहां जया बच्चन ने फिल्म उद्योग के आर्थिक दबावों की बात की, वहीं वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार पारदर्शी कर प्रणाली के माध्यम से संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस केवल कर नीति तक सीमित नहीं थी, बल्कि व्यापक रूप से आर्थिक प्रबंधन और उद्योगों पर सरकारी नीतियों के प्रभाव को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच मतभेद को दर्शाती है।
संसदीय कार्यवाही के दौरान ऐसे टकराव नई बात नहीं हैं, लेकिन यह घटना इसलिए चर्चा में रही क्योंकि इसमें दो प्रमुख हस्तियों के बीच सीधा संवाद और तीखा प्रतिवाद देखने को मिला।
हालांकि बाद में सदन की कार्यवाही सामान्य हुई और वित्त मंत्री ने अपना भाषण जारी रखा। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया कि संसद में नीतिगत मुद्दों पर बहस कितनी गंभीर और कभी-कभी तीखी हो सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि एंटरटेनमेंट टैक्स और अन्य आर्थिक मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच क्या रुख सामने आता है।