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जासूसी के आरोप में गिरफ्तारी
फर्जी पासपोर्ट, ISI कनेक्शन की जांच तेज
मेरठ में पाकिस्तानी मूल की महिला गिरफ्तार, जासूसी और फर्जी दस्तावेजों का मामला उजागर
17 Feb 2026, 11:48 AM Uttar Pradesh - Meerut
Reporter : Mahesh Sharma
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Meerut उत्तर प्रदेश के Meerut में पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक संवेदनशील मामले में पाकिस्तानी मूल की महिला को गिरफ्तार किया है। दिल्ली गेट थाना क्षेत्र से पकड़ी गई सबा फरहत उर्फ नाजिया पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाने और संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त रहने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला लंबे समय से भारत में रह रही थी। जांच में सामने आया है कि उसने अपनी बेटी के साथ मिलकर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और विभिन्न देशों की यात्राएं भी कीं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की तह तक जाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों से भी संपर्क किया गया है।

शिकायत के मुताबिक, सबा ने वर्ष 1993 में पाकिस्तान में अपनी बेटी को जन्म दिया था और उसे पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत लाया गया। बाद में भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने की कोशिश की गई। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि दस्तावेज बनाने में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

मामले में सबसे गंभीर आरोप जासूसी और स्लीपर सेल नेटवर्क से जुड़ा है। प्राथमिकी में दावा किया गया है कि आरोपी महिला के पिता पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence (ISI) से जुड़े रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि के लिए जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। यह भी जांच का विषय है कि क्या स्थानीय स्तर पर किसी स्लीपर सेल के गठन की कोशिश की जा रही थी या यह केवल दस्तावेजी अनियमितता का मामला है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि विदेशी यात्राओं का उद्देश्य क्या था और किन-किन देशों में आवाजाही हुई।

स्थानीय पुलिस ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और गहन जांच की जाएगी।

यह प्रकरण एक बार फिर सीमा पार से जुड़े संभावित नेटवर्क और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली की मजबूती पर सवाल खड़े करता है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखते हुए आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही हैं।