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सुप्रीम कोर्ट ने पलटा फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट का विवादित आदेश पलटा गया।
सुप्रीम कोर्ट ने पायजामे खींचने को रेप प्रयास माना, HC का विवादित फैसला पलटा
18 Feb 2026, 01:53 PM
Uttar Pradesh -
Allahabad
Reporter :
Mahesh Sharma
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Allahabad सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले को पलट दिया है, जिसमें हाई कोर्ट ने कहा था कि पायजामे का नाड़ा खींचना और ब्रेस्ट पकड़ना रेप की कोशिश नहीं मानी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह दृष्टिकोण क्रिमिनल जस्टिस प्रिसिपल्स के सिद्धांतों के खिलाफ है और हाई कोर्ट की गलती पर फटकार लगाई।
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया शामिल थे। बेंच ने कहा कि किसी भी प्रकार का शारीरिक हमला, विशेषकर नाबालिग लड़कियों पर, गंभीर अपराध माना जाएगा। पायजामे का नाड़ा खींचना और ब्रेस्ट पकड़ना सीधे रेप प्रयास और यौन अपराध की श्रेणी में आता है।
घटना 17 मार्च, 2025 को हुई थी। आरोपी ने लड़की पर हमला किया, लेकिन लड़की की रोने की आवाज सुनकर दो लोग मौके पर पहुंचे, जिससे आरोपी भागने में सफल हो गए। हाई कोर्ट ने इसके पहले निर्णय में अपराध की गंभीरता को कम आंकने की कोशिश की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अनुचित और कानूनी तौर पर गलत बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्रिमिनल कानून में अपराध की गंभीरता और पीड़ित की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी तरह की यौन हिंसा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह के फैसले से समाज में गलत संदेश जाएगा और कानून के प्रति भरोसा कमजोर होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय यौन अपराध मामलों में कानूनी स्पष्टता और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिहाज से मील का पत्थर है। इससे यह संदेश जाता है कि कानून किसी भी अपराध को मामूली नहीं आंकता और नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
मामले ने पूरे देश में कानून और न्याय के महत्व पर बहस छेड़ दी है। अदालत ने न केवल हाई कोर्ट को फटकार लगाई, बल्कि यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे विवादास्पद फैसलों से बचने के लिए क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में संवेदनशीलता और सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया शामिल थे। बेंच ने कहा कि किसी भी प्रकार का शारीरिक हमला, विशेषकर नाबालिग लड़कियों पर, गंभीर अपराध माना जाएगा। पायजामे का नाड़ा खींचना और ब्रेस्ट पकड़ना सीधे रेप प्रयास और यौन अपराध की श्रेणी में आता है।
घटना 17 मार्च, 2025 को हुई थी। आरोपी ने लड़की पर हमला किया, लेकिन लड़की की रोने की आवाज सुनकर दो लोग मौके पर पहुंचे, जिससे आरोपी भागने में सफल हो गए। हाई कोर्ट ने इसके पहले निर्णय में अपराध की गंभीरता को कम आंकने की कोशिश की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अनुचित और कानूनी तौर पर गलत बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्रिमिनल कानून में अपराध की गंभीरता और पीड़ित की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी तरह की यौन हिंसा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह के फैसले से समाज में गलत संदेश जाएगा और कानून के प्रति भरोसा कमजोर होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय यौन अपराध मामलों में कानूनी स्पष्टता और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिहाज से मील का पत्थर है। इससे यह संदेश जाता है कि कानून किसी भी अपराध को मामूली नहीं आंकता और नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
मामले ने पूरे देश में कानून और न्याय के महत्व पर बहस छेड़ दी है। अदालत ने न केवल हाई कोर्ट को फटकार लगाई, बल्कि यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे विवादास्पद फैसलों से बचने के लिए क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में संवेदनशीलता और सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।