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भारत की प्रगति पर उठाए सवाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में देश की वर्तमान परिस्थितियों और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत लगातार विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन कुछ शक्तियां ऐसी हैं जो इस प्रगति को रोकने के लिए भ्रम फैलाने और झूठे नैरेटिव गढ़ने का काम कर रही हैं। उनके अनुसार देश की उपलब्धियों को कमतर दिखाने की कोशिशें समाज में भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत का उत्थान केवल देश के लिए ही नहीं बल्कि विश्व समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में नागरिकों को तथ्यों और वास्तविकताओं को समझते हुए राष्ट्रहित में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज की जागरूकता और एकता ही ऐसे प्रयासों का सबसे प्रभावी जवाब है। राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है और यही भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
इतिहास से प्रेरणा लेने का संदेश
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने भारतीय इतिहास के उन अध्यायों का उल्लेख किया जो संघर्ष, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल घटनाओं का संग्रह नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत होता है। उन्होंने महाराणा प्रताप जैसे महान योद्धाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके जीवन से साहस, त्याग और स्वाभिमान की सीख मिलती है। भागवत ने कहा कि देश का इतिहास गुलामी का नहीं बल्कि संघर्ष और आत्मबल का इतिहास है। अनेक चुनौतियों के बावजूद भारतीय समाज ने अपने मूल्यों और संस्कृति को जीवित रखा। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे इतिहास को सही संदर्भ में समझें और उससे सकारात्मक प्रेरणा प्राप्त करें। उनके अनुसार इतिहास की सही समझ समाज को मजबूत बनाती है और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को बढ़ाती है।
राष्ट्रहित में जागरूकता सबसे आवश्यक
मोहन भागवत ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति केवल उसकी आर्थिक या सैन्य क्षमता से नहीं मापी जाती बल्कि समाज की एकजुटता और जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि आज सूचना के दौर में गलत जानकारियां तेजी से फैलती हैं, इसलिए लोगों को विवेकपूर्ण ढंग से सूचनाओं का मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सत्यापन के किसी भी सूचना पर विश्वास करना समाज में भ्रम और विभाजन को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में बाधा डालने वाले तत्व अक्सर असत्य सूचनाओं का सहारा लेते हैं। ऐसे में नागरिकों का दायित्व है कि वे सत्य, तर्क और तथ्य के आधार पर अपनी राय बनाएं। उन्होंने युवाओं को विशेष रूप से जागरूक रहने की सलाह दी और कहा कि भविष्य का भारत उन्हीं के हाथों में है।
महाराणा प्रताप की विरासत का उल्लेख
कार्यक्रम के दौरान महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर उनके योगदान और संघर्ष को याद किया गया। मोहन भागवत ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक शासक नहीं बल्कि स्वतंत्रता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का संघर्ष भारतीय इतिहास में आत्मसम्मान और दृढ़ संकल्प का महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर अडिग रहना ही सच्ची वीरता है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को ऐसे महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनके अनुसार राष्ट्र के प्रति समर्पण और कर्तव्यबोध ही समाज को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी शक्ति है।
एकता से मजबूत होगा नया भारत
अपने संबोधन में उन्होंने समाज की एकजुटता को राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद भारत की पहचान उसकी विविधता में एकता है। यदि समाज एकजुट होकर कार्य करे तो किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए और व्यक्तिगत या राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देश के विकास में योगदान देना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्रगति विश्व शांति और मानवता के कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए।
भविष्य की दिशा और संदेश
कार्यक्रम के अंत में मोहन भागवत ने सकारात्मक सोच, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत के सामने अनेक अवसर मौजूद हैं और यदि समाज जागरूक तथा संगठित रहेगा तो देश नई उपलब्धियां हासिल करेगा। उन्होंने युवाओं, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि चुनौतियां हर दौर में आती हैं, लेकिन सामूहिक प्रयास, सही दृष्टिकोण और दृढ़ संकल्प से उन्हें अवसरों में बदला जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत आने वाले वर्षों में विकास, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के क्षेत्र में दुनिया के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।
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