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नई पर्यटन नीति को मिली मंजूरी
चंडीगढ़ प्रशासन ने पर्यटन क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' (होमस्टे) नीति लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अब निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले बड़े रिहायशी मकानों में होमस्टे संचालित किए जा सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे शहर में आने वाले पर्यटकों को होटल के अलावा घरेलू वातावरण में ठहरने का विकल्प मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अधिकारियों के अनुसार यह नीति शहर की पर्यटन क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने का प्रयास है। हालांकि होमस्टे संचालन पूरी तरह निर्धारित नियमों और लाइसेंस प्रक्रिया के अधीन रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल पात्र आवेदकों को ही अनुमति दी जाएगी तथा समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाएगा ताकि व्यवस्था पारदर्शी और व्यवस्थित बनी रहे।
बड़े मकानों को मिलेगी संचालन अनुमति
नई नीति के अनुसार केवल वे रिहायशी मकान ही होमस्टे के रूप में पंजीकरण करा सकेंगे जिनका क्षेत्रफल कम से कम 500 वर्ग गज या उससे अधिक होगा। इच्छुक मकान मालिकों को संबंधित विभाग से लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति किसी भी प्रकार का व्यावसायिक संचालन मान्य नहीं होगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि होमस्टे का संचालन पूरी तरह आवासीय स्वरूप को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा, ताकि आसपास के लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सुरक्षा, स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा और अतिथि पंजीकरण जैसे सभी नियमों का पालन करना भी अनिवार्य रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य होटल व्यवसाय का विकल्प तैयार करना नहीं, बल्कि नियंत्रित और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना है।
पुरानी योजना से लिया गया अनुभव
प्रशासन ने बताया कि वर्ष 2008 में भी इसी तरह की योजना लागू की गई थी, लेकिन समय के साथ कुछ स्थानों पर उसका दुरुपयोग होने लगा। कई आवासीय भवनों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए होने लगा, जिसके कारण योजना को वापस लेना पड़ा था। इस बार नई नीति में पहले की कमियों को ध्यान में रखते हुए सख्त प्रावधान जोड़े गए हैं। लाइसेंस जारी करने से पहले विस्तृत जांच की जाएगी और संचालन के दौरान भी नियमित निगरानी रखी जाएगी। यदि कोई संचालक निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल जिम्मेदार और नियंत्रित होमस्टे संस्कृति को बढ़ावा देना है।
पड़ोसियों की सुविधा रहेगी प्राथमिकता
नई नीति में स्थानीय निवासियों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। यदि किसी होमस्टे के संचालन से आसपास रहने वाले लोगों को शोर, पार्किंग, सुरक्षा या अन्य किसी प्रकार की समस्या होती है और शिकायत सही पाई जाती है, तो संबंधित लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि होमस्टे संचालकों को अपने मेहमानों के व्यवहार और सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी स्वयं उठानी होगी। साथ ही अतिथियों का रिकॉर्ड निर्धारित नियमों के अनुसार सुरक्षित रखना भी अनिवार्य रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि पर्यटन विकास और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाए रखना इस नीति की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि नई होमस्टे नीति से चंडीगढ़ में घरेलू और बाहरी पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। इससे स्थानीय लोगों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा, जबकि पर्यटकों को कम खर्च में बेहतर और पारिवारिक वातावरण वाला ठहराव उपलब्ध हो सकेगा। प्रशासन का विश्वास है कि यह नीति शहर की पर्यटन पहचान को और मजबूत करेगी। आने वाले समय में यदि योजना सफल रहती है तो पर्यटन से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी नए सुधार किए जा सकते हैं। फिलहाल प्रशासन ने लोगों से नियमों का पालन करने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही आवेदन करने की अपील की है ताकि योजना का लाभ पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से सभी पात्र नागरिकों तक पहुंच सके।
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