Search News
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- रक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- आपदा व आपातकाल
- स्वास्थ्य
- फिटनेस व वेलनेस
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- ऑटोमोबाइल व ईवी
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
मेरठ में बंदरों के हुड़दंग से परेशान शहरवासियों को राहत दिलाने के लिए वन विभाग इस वृक्षारोपण महोत्सव में एक अनोखा प्रयोग करने जा रहा है. इसके तहत शहर के विभिन्न स्थानों पर 'कपिवन' बसाए जाएंगे, जिनमें बड़े पैमाने पर फलदार पौधे लगाए जाएंगे ताकि बंदरों को खाने-पीने की चीजें वहीं मिल सकें. मेरठ की डीएफओ वंदना फोगाट के अनुसार, इस पहल से बंदरों का शहर की तरफ आना कम होगा.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में अगर आप भी बंदरों के हुड़दंग और आतंक से परेशान हैं और वन विभाग व नगर निगम के चक्कर काटकर थक चुके हैं, तो आपके लिए एक राहत भरी खबर है. अब बंदरों की इस समस्या से हमेशा के लिए निजात दिलाने के लिए वन विभाग इस बार वृक्षारोपण महोत्सव में एक बेहद अनोखा प्रयोग करने जा रहा है. विभाग की योजना शहर में ‘कपिवन’ बसाने की है, जिससे लोगों को इस बड़ी मुसीबत से छुटकारा मिल सके. इस योजना को लेकर मेरठ की डीएफओ वंदना फोगाट ने खास जानकारी साझा की है.
मेरठ की डीएफओ वंदना फोगाट ने बताया कि शहर की तरफ बंदरों का आना लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे लोग काफी परेशान हैं और विभाग को आए दिन शिकायतें मिलती रहती हैं. इसी को देखते हुए इस साल वृक्षारोपण महोत्सव के दौरान कपिवन बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी. इन विशेष वनों में सबसे ज्यादा फलदार पौधे लगाए जाएंगे ताकि बंदरों को खाने-पीने की हर चीज वहीं मिल जाए और उन्हें भोजन की तलाश में शहर का रुख न करना पड़े. भविष्य में बंदर इन वनों में आसानी से रह सकें, इसके लिए विभाग लगातार इनकी मॉनिटरिंग भी करेगा. ये कपिवन बंदरों को उनके घर जैसा ही एहसास कराएगा.
हर कोई एक दूसरे पर फोड़ता था ठीकरा
दरअसल, मेरठ के लोग बंदरों से इस कदर परेशान हैं कि कई बार दुर्घटनाओं का शिकार भी हो चुके हैं. लोग नगर निगम से लेकर वन विभाग तक गुहार लगा चुके थे, लेकिन दोनों ही विभाग बंदरों की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टालते रहे हैं, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा था. अब उम्मीद जताई जा रही है कि वन विभाग की इस नई कोशिश से शहरवासियों को बंदरों के डर से बड़ी राहत मिल पाएगी.
इसके साथ ही वन विभाग पर्यावरण को बढ़ावा देने और गंगा को सुरक्षित रखने के लिए नदी के किनारे ‘अविरल धारा वन’ और ‘सौर ऊर्जा वन’ समेत कई अन्य तरह के विशेष वन भी तैयार करने जा रहा है, जो प्रकृति को बचाने में अहम भूमिका निभाएंगे.
Latest News