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मिसाइल उत्पादन में साझेदारी
निजी क्षेत्र में पहली हेलीकॉप्टर निर्माण इकाई शुरू हुई।
भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी नई ऊंचाई पर, राफेल से पनडुब्बी निर्माण को गति
18 Feb 2026, 12:54 PM Maharashtra - Mumbai
Reporter : Mahesh Sharma
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Mumbai भारत और फ्रांस के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई मजबूती मिली है। मुंबई में हुई उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री Narendra Modi और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक आयाम देने पर सहमति जताई। इस वार्ता के दौरान दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया।

बैठक में भारतीय नौसेना के लिए 26 Rafale मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद और भविष्य में उनके भारत में निर्माण पर विशेष चर्चा हुई। यह कदम भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू रक्षा उद्योग को भी सशक्त करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की समुद्री सुरक्षा और वायु शक्ति दोनों को मजबूती मिलेगी।

इसके अलावा, पनडुब्बी निर्माण परियोजनाओं में फ्रांस की भागीदारी को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच दोनों देशों ने संयुक्त समुद्री अभ्यास और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा संतुलन के लिए अहम माना जा रहा है।

रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के तहत Tata Group और Airbus ने देश की पहली निजी हेलीकॉप्टर निर्माण सुविधा शुरू की है। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेगा।

मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली है। Bharat Electronics Limited और Safran के बीच उन्नत हथियार प्रणालियों और इंजन तकनीक के स्वदेशी उत्पादन को लेकर समझौता हुआ है। इससे अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में भारत की निर्भरता कम होगी और निर्यात संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता केवल रक्षा खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी नवाचार, अनुसंधान सहयोग और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का स्पष्ट संकेत है। दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान और उन्नत रक्षा प्रणालियों में भी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

कुल मिलाकर, यह रक्षा समझौता भारत-फ्रांस संबंधों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। इससे भारत की सामरिक स्थिति मजबूत होगी और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका और प्रभाव में भी वृद्धि होने की संभावना है।