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इंश्योरेंस के नाम पर ठगी
RTGS से 42 लाख ट्रांसफर, जालसाज फरार
अमेठी में फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर 42 लाख की साइबर ठगी, पीड़ित के उड़े होश
17 Feb 2026, 03:27 PM
Uttar Pradesh -
Amethi
Reporter :
Mahesh Sharma
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Amethi उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति को फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर 42 लाख रुपये का चूना लगा दिया गया। यह घटना शुकुल बाजार थाना क्षेत्र के ब्योरेमऊ गांव की है, जहां निवासी राम मिलन इस ठगी का शिकार हुए।
जानकारी के मुताबिक, राम मिलन ने वर्ष 2014 में दिल्ली की एक निजी कंपनी से एक इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी थी। दो साल बाद संबंधित एजेंट की मौत हो गई, जिसके कारण प्रीमियम जमा करने और पॉलिसी से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में उन्हें दिक्कत आने लगी। इसी दौरान राहुल जैन नाम के एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए पॉलिसी की रकम दिलाने का भरोसा दिया।
आरोपी ने दावा किया कि पॉलिसी की बड़ी राशि क्लेम के रूप में मिलने वाली है, लेकिन इसके लिए पहले टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के नाम पर भुगतान करना होगा। भरोसा जीतने के लिए उसने आधिकारिक दस्तावेजों जैसे दिखने वाले कागजात भी भेजे।
राम मिलन ने आरोपी के झांसे में आकर अलग-अलग बैंक खातों में RTGS के माध्यम से रकम ट्रांसफर करनी शुरू कर दी। यह सिलसिला लगातार चलता रहा और अगस्त 2025 तक उन्होंने कुल 42 लाख रुपये विभिन्न खातों में भेज दिए। आखिरी बार 6 अगस्त 2025 को उन्होंने 1.94 लाख रुपये ट्रांसफर किए।
जब काफी समय बीत जाने के बाद भी उन्हें पॉलिसी की रकम नहीं मिली और आरोपी का फोन बंद हो गया, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल की मदद से आरोपी की तलाश की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के मामलों में अपराधी पहले पीड़ित का विश्वास जीतते हैं और फिर चरणबद्ध तरीके से बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के भुगतान से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या शाखा से जानकारी की पुष्टि जरूर करें।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इंश्योरेंस क्लेम के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी आई है। ठग नकली दस्तावेज और फर्जी पहचान के जरिए लोगों को भ्रमित करते हैं। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
इस घटना ने क्षेत्र में लोगों को सावधान कर दिया है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को जल्द पकड़कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, राम मिलन ने वर्ष 2014 में दिल्ली की एक निजी कंपनी से एक इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी थी। दो साल बाद संबंधित एजेंट की मौत हो गई, जिसके कारण प्रीमियम जमा करने और पॉलिसी से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में उन्हें दिक्कत आने लगी। इसी दौरान राहुल जैन नाम के एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए पॉलिसी की रकम दिलाने का भरोसा दिया।
आरोपी ने दावा किया कि पॉलिसी की बड़ी राशि क्लेम के रूप में मिलने वाली है, लेकिन इसके लिए पहले टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के नाम पर भुगतान करना होगा। भरोसा जीतने के लिए उसने आधिकारिक दस्तावेजों जैसे दिखने वाले कागजात भी भेजे।
राम मिलन ने आरोपी के झांसे में आकर अलग-अलग बैंक खातों में RTGS के माध्यम से रकम ट्रांसफर करनी शुरू कर दी। यह सिलसिला लगातार चलता रहा और अगस्त 2025 तक उन्होंने कुल 42 लाख रुपये विभिन्न खातों में भेज दिए। आखिरी बार 6 अगस्त 2025 को उन्होंने 1.94 लाख रुपये ट्रांसफर किए।
जब काफी समय बीत जाने के बाद भी उन्हें पॉलिसी की रकम नहीं मिली और आरोपी का फोन बंद हो गया, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल की मदद से आरोपी की तलाश की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के मामलों में अपराधी पहले पीड़ित का विश्वास जीतते हैं और फिर चरणबद्ध तरीके से बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के भुगतान से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या शाखा से जानकारी की पुष्टि जरूर करें।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इंश्योरेंस क्लेम के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी आई है। ठग नकली दस्तावेज और फर्जी पहचान के जरिए लोगों को भ्रमित करते हैं। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
इस घटना ने क्षेत्र में लोगों को सावधान कर दिया है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को जल्द पकड़कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।