Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- स्वास्थ्य
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
Current:
India
Country: India
Selected State: None
35 साल बाद गूंजी किलकारी
बेटी के नामकरण पर 130 गांव बने मेहमान
ऐतिहासिक पल के हजारों लोग बने गवाह
11 Feb 2026, 03:01 PM
Haryana -
Sonipat
Reporter :
Arun Mishra
ADVERTISEMENT
Sponsored
Ad
Open
Sonipat बेटियां बेटों से कम नहीं होती। इस बात को हरियाणा के सोनीपत के एक परिवार ने सिद्ध कर दिखाया है। घर में 35 साल बाद बेटी का जन्म हुआ तो परिवार ने बेटी के नामकरण के लिए 130 गावों को निमंत्रण दिया। हजारों लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह भी बने।
सोनीपत जिला मुख्यालय से सटे गांव महलाना ने रविवार को सामाजिक चेतना की एक ऐसी नजीर पेश की है, जो सदियों तक याद रहेगी। रोहित बाल्याण के घर में 35 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद बेटी का जन्म हुआ। यह खुशी परिवार तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें 130 गांवों के लोग साक्षी बने। नामकरण संस्कार में राजदुलारी कामाक्षी और उसकी जननी को ढोल-नगाड़ों की गूंज और हाथी-घोड़ों व रथ आदि के साथ आयोजन स्थल तक लाया गया। फूलों की वर्षा ने माहौल को स्वर्ग बना डाला।
कामाक्षी का जन्म 6 जनवरी को हुआ था। रविवार को उसका नामकरण संस्कार पूरे पारंपरिक और भव्य स्वरूप में संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन में आसपास के करीब 130 गांवों से हजारों लोग शामिल हुए।
शंखनाद के बीच पूरे दिन चला यज्ञ, चलता रहा विशाल भंडारा
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण और हवन के साथ हुई। शंखनाद के बीच विधिवत रूप से बेटी का नामकरण संस्कार संपन्न कराया गया। परिवार ने बेटी का नाम कामाक्षी (माता पार्वती का एक रूप) रखा। नाम की घोषणा होते ही पूरा पंडाल तालियों और उल्लास से गूंज उठा। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
बेटों से कम नहीं बेटियां
पिता रोहित बाल्याण ने भावुक होते हुए कहा कि आज बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। बेटी का जन्म भी उतनी ही खुशी और गर्व का विषय होना चाहिए जितना बेटे का। हमारा यह आयोजन समाज को यह संदेश देने का प्रयास है कि बेटियां परिवार की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत होती हैं। उनके पास पहले एक बड़ा बेटा है। अब दूसरे बच्चे के रूप में घर में बेटी ने जन्म लिया है।
ग्रामीणों ने बताया सामाजिक चेतना की मिसाल
ग्रामीणों ने इस आयोजन को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का जीवंत उदाहरण बताया। उनका कहना था कि जहां आज भी कुछ स्थानों पर बेटियों के साथ भेदभाव और भ्रूणहत्या जैसी घटनाएं होती हैं, वहीं महलाना का यह आयोजन सोच बदलने वाला प्रेरक संदेश देता है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि हर परिवार बेटियों को इसी तरह सम्मान देगा, तो समाज अपने आप बेहतर दिशा में आगे बढ़ेगा।
राजनीतिक व सामाजिक लोगों की रही मौजूदगी
भव्य कार्यक्रम में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। मुख्यमंत्री नायब सैनी के सलाहकार तरुण भंडारी, कांग्रेस जिला अध्यक्ष कमल दिवान, पूर्व विधायक सुरेंद्र पंवार, अभिषेक ब्रह्मचारी, किसान नेता नरेश टिकैत के पुत्र गौरव टिकैत ने भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
सोनीपत जिला मुख्यालय से सटे गांव महलाना ने रविवार को सामाजिक चेतना की एक ऐसी नजीर पेश की है, जो सदियों तक याद रहेगी। रोहित बाल्याण के घर में 35 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद बेटी का जन्म हुआ। यह खुशी परिवार तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें 130 गांवों के लोग साक्षी बने। नामकरण संस्कार में राजदुलारी कामाक्षी और उसकी जननी को ढोल-नगाड़ों की गूंज और हाथी-घोड़ों व रथ आदि के साथ आयोजन स्थल तक लाया गया। फूलों की वर्षा ने माहौल को स्वर्ग बना डाला।
कामाक्षी का जन्म 6 जनवरी को हुआ था। रविवार को उसका नामकरण संस्कार पूरे पारंपरिक और भव्य स्वरूप में संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन में आसपास के करीब 130 गांवों से हजारों लोग शामिल हुए।
शंखनाद के बीच पूरे दिन चला यज्ञ, चलता रहा विशाल भंडारा
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण और हवन के साथ हुई। शंखनाद के बीच विधिवत रूप से बेटी का नामकरण संस्कार संपन्न कराया गया। परिवार ने बेटी का नाम कामाक्षी (माता पार्वती का एक रूप) रखा। नाम की घोषणा होते ही पूरा पंडाल तालियों और उल्लास से गूंज उठा। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
बेटों से कम नहीं बेटियां
पिता रोहित बाल्याण ने भावुक होते हुए कहा कि आज बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। बेटी का जन्म भी उतनी ही खुशी और गर्व का विषय होना चाहिए जितना बेटे का। हमारा यह आयोजन समाज को यह संदेश देने का प्रयास है कि बेटियां परिवार की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत होती हैं। उनके पास पहले एक बड़ा बेटा है। अब दूसरे बच्चे के रूप में घर में बेटी ने जन्म लिया है।
ग्रामीणों ने बताया सामाजिक चेतना की मिसाल
ग्रामीणों ने इस आयोजन को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का जीवंत उदाहरण बताया। उनका कहना था कि जहां आज भी कुछ स्थानों पर बेटियों के साथ भेदभाव और भ्रूणहत्या जैसी घटनाएं होती हैं, वहीं महलाना का यह आयोजन सोच बदलने वाला प्रेरक संदेश देता है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि हर परिवार बेटियों को इसी तरह सम्मान देगा, तो समाज अपने आप बेहतर दिशा में आगे बढ़ेगा।
राजनीतिक व सामाजिक लोगों की रही मौजूदगी
भव्य कार्यक्रम में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। मुख्यमंत्री नायब सैनी के सलाहकार तरुण भंडारी, कांग्रेस जिला अध्यक्ष कमल दिवान, पूर्व विधायक सुरेंद्र पंवार, अभिषेक ब्रह्मचारी, किसान नेता नरेश टिकैत के पुत्र गौरव टिकैत ने भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।